नई दिल्ली/श्रीनगर। बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को आने वाले वर्षों में बड़ी सुविधा मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने बालटाल से पवित्र अमरनाथ गुफा तक प्रस्तावित रोपवे (केबल कार) परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है।
योजना के अनुसार, परियोजना का निर्माण कार्य अप्रैल 2027 से शुरू किया जाएगा और इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद अभी पैदल या टट्टू से 5 से 8 घंटे में तय होने वाला सफर महज 30 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
प्रस्तावित रोपवे बालटाल से अमरनाथ गुफा तक लगभग 11.6 किलोमीटर लंबा होगा। इसे केंद्र सरकार की ‘पर्वतमाला’ योजना के तहत विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), तकनीकी सर्वेक्षण और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य कठिन पर्वतीय मार्ग पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित, तेज और हर मौसम में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्तमान में अधिकांश श्रद्धालु बालटाल मार्ग से लगभग 13 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल, घोड़े, पालकी या सीमित हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए पूरी करते हैं। खराब मौसम, ऊंचाई और कठिन रास्ते के कारण बुजुर्गों, दिव्यांगों और बीमार श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोपवे शुरू होने के बाद यात्रा न केवल आसान होगी, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सहायता और राहत-बचाव कार्यों में भी
तेजी आएगी।
सरकार का कहना है कि परियोजना के निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किया जाएगा, ताकि प्राकृतिक संतुलन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। रोपवे के चालू होने से यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन में भी सुधार आने की उम्मीद है।
{कई रोपवे परियोजनाओं का हिस्सा: यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित कई रोपवे परियोजनाओं का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने अमरनाथ के अलावा शंकराचार्य मंदिर, थाजीवास ग्लेशियर, भद्रवाह, सनासर और दूधपथरी जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के लिए भी रोपवे परि योजनाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
इनका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को मजबूत करना है। हालांकि, परियोजना को लेकर कुछ पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों ने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी, कचरा प्रबंधन और यात्रियों की संख्या में संभावित वृद्धि को लेकर चिंता भी जताई है।
उनका कहना है कि निर्माण और संचालन के दौरान पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। वहीं, सरकार का दावा है कि सभी आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृतियां और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
{हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को लाभ: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार काम पूरा होता है, तो 2029 से अमरनाथ यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।
इससे हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को लाभ मिलने के साथ जम्मू-कश्मीर के पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।