Summer express, नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और कमजोर मानसून गतिविधियों के बीच लोगों की चिंता बढ़ गई है। हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर बारिश कब तेज होगी और गर्मी से राहत कब मिलेगी। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने मानसून और जुलाई के मौसम को लेकर ताजा पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें देश के अधिकांश हिस्सों के लिए सामान्य से कम बारिश और अपेक्षाकृत अधिक तापमान की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, देशभर में वर्तमान में बारिश की जो लगभग 40 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है, उसमें अगले 7 से 10 दिनों के दौरान होने वाली अच्छी वर्षा के कारण कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, पूरे जुलाई महीने के दौरान देश के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश सामान्य स्तर से कम रहने का अनुमान है।
जुलाई में बढ़ सकती है गर्मी की चुनौती
मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई में केवल बारिश ही कम नहीं रहेगी, बल्कि कई राज्यों में तापमान भी सामान्य से अधिक बना रह सकता है। इसके चलते लोगों को उमस और गर्मी दोनों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
अगले 2-3 दिनों में इन राज्यों तक पहुंचेगा मानसून
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और राजस्थान के कुछ और हिस्सों को पूरी तरह कवर कर लेगा।
उन्होंने बताया कि बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो रहा है, जिसके प्रभाव से जुलाई के पहले 10 दिनों के दौरान ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मध्य भारत, गुजरात और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
किसानों के लिए राहत की उम्मीद
जुलाई का महीना खरीफ फसलों, विशेष रूप से धान और मक्का की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मौसम विभाग का मानना है कि अगले 7 से 10 दिनों में होने वाली बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। विशेषकर मध्य भारत के वे क्षेत्र, जहां खेती मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर करती है, वहां बुआई गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
जून में दर्ज हुई पांचवीं सबसे कम बारिश
मौसम विभाग ने इस वर्ष जून महीने के वर्षा आंकड़ों को भी चिंताजनक बताया है। आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में देशभर में केवल 99.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो वर्ष 1901 के बाद से पांचवीं सबसे कम जून की वर्षा है। इससे पहले सबसे कम बारिश वाले जून वर्ष 2009 (87.6 मिमी), 1905 (91.9 मिमी), 2014 (92.8 मिमी) और 1926 (96.7 मिमी) में दर्ज किए गए थे।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में समुद्री प्रणाली (IOD) कुछ मजबूत हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो मानसून के अंतिम चरण में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जून और जुलाई में हुई बारिश की कमी की पूरी भरपाई होना मुश्किल होगा।