रावलकोट | पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और सामाजिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है। रावलकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और स्थानीय अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने यह दावा भी किया कि PoK की जनता खुद को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानती।
इस आंदोलन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगठन के प्रमुख शौकत नवाज़ मीर को उनके दो सहयोगियों के साथ धीरकोट इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर एक करोड़ रुपये तक के इनाम की घोषणा की थी।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने अब तक JAAC से जुड़े 600 से अधिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लिया है। कई नेताओं पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। पाकिस्तान प्रशासन ने 5 जून को JAAC पर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए।
शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, बिजली संकट, खाद्य सामग्री की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब यह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक राजनीतिक असंतोष का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए जरूरी वस्तुओं की सप्लाई और परिवहन व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।
हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की एक टिप्पणी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और सरकार विरोधी नारेबाजी देखने को मिली।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून की शुरुआत से PoK के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं भी बाधित हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार विरोध की आवाज और घटनाओं की जानकारी बाहर जाने से रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर रही है।
कुछ स्थानीय दावों में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में करीब 22 लोगों की मौत हुई है, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग है।
गौरतलब है कि PoK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 53 सदस्यीय विधानसभा में 45 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान होता है, जबकि शेष सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए आरक्षित हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए चुनाव से पहले क्षेत्र में राजनीतिक माहौल और अधिक संवेदनशील होता दिखाई दे रहा है।