गुरमीत सिंह | ज़ीरकपुर
ज़ीरकपुर शहर में अवैध निर्माण एक बड़ी समस्या बन चुकी है और नगर परिषद इन्हें रोकने व निगरानी करने में लगातार असमर्थ दिखाई दे रही है। क्षेत्रफल के अनुपात में स्थायी फील्ड स्टाफ और बिल्डिंग इंस्पेक्टरों की कमी के कारण अवैध निर्माणों की जिम्मेदारी तकनीकी रूप से ठेका-आधारित कर्मचारियों पर रखी जा रही है, जिनके पास आवश्यक तकनीकी योग्यता नहीं है। नतीजन ये कर्मचारी बिना आवश्यक प्रशिक्षण के सरकारी वाहन चला कर निरीक्षण करते हैं और स्टाफ केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रह जाता है।
इस कमी के चलते नक्शे पास करवा कर पीजी, होटल और शोरूम बिना सही अनुमति के बनाए जा रहे हैं, जिससे शहर की पानी और सीवरेज जैसी बुनियादी सेवाओं पर दबाव बढ़ा है और इन सुविधाओं के संबंध में शिकायतें भी बढ़ी हैं।
तेज़ी से हो रहे विकास के बावजूद नगर परिषद के अधिकारी भी कर्मचारियों की कमी के कारण इस समस्या से निपटने में जूझ रहे हैं। ठेका-आधारित कर्मचारियों को निगरानी की जिम्मेदारी देने से तकनीकी ज्ञान और कौशल की कमी के कारण वे जिम्मेदारी के साथ निगरानी नहीं कर पा रहे। परिणामस्वरूप लोग इमारती नियमों का उल्लंघन करके बिना वैध अनुमति के निर्माण कर रहे हैं। नगर परिषद के कुछ अधिकारी, जिन्होंने अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बात की – इस गंभीर समस्या को स्वीकार करते हैं और स्थायी फील्ड स्टाफ की भर्ती बढ़ाने की बात कहते हैं।