Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। बुधवार को उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आयोजित शिक्षा विभाग की बैठक के बाद शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि प्रिंसिपलों की पदोन्नति अब मेरिट आधारित नीति के तहत की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई पदोन्नति सूची का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आवश्यकता पड़ने पर इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रिंसिपलों के कई पद रिक्त हैं, इसलिए अतिरिक्त प्रिंसिपलों की नियुक्ति जरूरत वाले स्कूलों में की जाएगी, ताकि शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूलों के विलय की प्रक्रिया मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच में नहीं की जाएगी और इस संबंध में छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जम्मू-कश्मीर की कुछ सफल व्यवस्थाओं को अपनाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत स्कूलों का ऑनलाइन निरीक्षण शुरू किया जाएगा, जिससे निगरानी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक वर्ष की विशेष योजना तैयार की जा रही है। प्रत्येक जिले में विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी सरकार कार्य कर रही है।उन्होंने रामानुजन स्टूडेंट डिजिटल डिवाइस योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि मेधावी विद्यार्थियों को जल्द ही डीबीटी के माध्यम से लैपटॉप के लिए 16 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल तकनीकी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि इन पहलों से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता को नई मजबूती मिलेगी।