8 July, 205
सराज विधानसभा क्षेत्र के थुनाग गांव में एक छोटे से नाले ने रातोंरात विकराल रूप धारण कर लिया और भीषण तबाही मचाई। रात लगभग 11:30 बजे आई इस जलप्रलय में गांव के 5 मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गए, जबकि अन्य कई घर रहने योग्य नहीं बचे। प्रभावित परिवार अब राहत शिविरों और अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हैं।
आपदा में जिन घरों का नुकसान हुआ है, उनके अनुसार मलबा घरों की दूसरी मंजिल तक भर चुका है। बाढ़ के साथ आए पेड़ और विशालकाय पत्थर इस आपदा की भयावहता की गवाही दे रहे हैं।
पीड़ितों की दर्दभरी दास्तां
आपदा पीड़ित नंदा कुमारी और कांता देवी ने बताया कि उनका परिवार दशकों से इस स्थान पर रह रहा था। लेकिन उस रात आई बाढ़ ने उन्हें पल भर में बेघर कर दिया। अब उनके पास सिर्फ तन पर पहने कपड़े ही शेष हैं।
नंदा कुमारी, आपदा प्रभावित हमारे घर के साथ लगते छोटे नाले ने रातोंरात रौद्र रूप ले लिया। कुछ समझ नहीं आया, बस जान बचाकर भागे। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा।”
कांता देवी, आपदा प्रभावित, “हमने अपनी जिंदगी की सारी कमाई इस घर में लगाई थी, अब सब मलबे में दफन हो गया है।”
जमना देवी, जो पिछले 27 वर्षों से थुनाग में रह रही हैं, ने बताया कि इस बाढ़ ने 5 परिवारों के करीब 25-30 लोगों को बेघर कर दिया है। उनके अनुसार यह नाला पहले बेहद छोटा था, लेकिन अब यह किसी खड्ड जैसा बन गया है।जमना देवी के पति किडनी रोगी हैं, जिन्हें सड़क मार्ग खुलने के बाद इलाज के लिए जालंधर ले जाया गया।
सरकार से सुरक्षित पुनर्वास की मांग
सभी प्रभावित परिवारों ने सरकार से अपील की है कि उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर पुनः बसाया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की त्रासदी से बचा जा सके।