Summer express/धर्मशाला, राहुल-: खरीफ सीजन के दौरान मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवर्म (Fall Armyworm) के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार यदि इस कीट की शुरुआती अवस्था में पहचान कर उचित प्रबंधन किया जाए तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके लिए कृषि विभाग की टीमें लगातार खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. राहुल कटोच ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म पिछले कुछ वर्षों से मक्की की खेती के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में इस कीट की पहली पहचान कर्नाटक के शिवगिरी हिल्स क्षेत्र में हुई थी, जिसके बाद इसका प्रकोप देश के कई राज्यों सहित हिमाचल प्रदेश में भी फैल गया। उन्होंने बताया कि इस कीट की मादा एक बार में लगभग एक हजार अंडे देने की क्षमता रखती है, जिससे इसकी संख्या तेजी से बढ़ती है और फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है।डॉ. कटोच ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों के अनुरूप प्रभावी कीटनाशक कृषि विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को खट्टी लस्सी और अन्य प्राकृतिक घोलों के उपयोग की सलाह दी गई है। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि खेतों में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप दिखाई दे तो तुरंत कृषि विभाग या प्राकृतिक खेती से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई कर फसल को सुरक्षित रखा जा सके।