Summer express, चंडीगढ़। आठ लाख रुपये के कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार पंजाब के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर और कथित बिचौलिए कृष्णु शारदा की ओर से दायर आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) याचिका पर मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत अहम फैसला सुना सकती है। दोनों आरोपियों ने अदालत से मामले से बरी किए जाने की मांग की है।
हरचरण सिंह भुल्लर और कृष्णु शारदा को सीबीआई ने पिछले वर्ष 16 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। डिस्चार्ज याचिका में भुल्लर की ओर से दलील दी गई है कि वह पंजाब सरकार के अधिकारी हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का अधिकार सीबीआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। उनके वकील का तर्क है कि राज्य कैडर के आईपीएस अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन नहीं होते, इसलिए सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और गिरफ्तारी कानूनी रूप से वैध नहीं है। इस संबंध में मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया गया है।
दूसरी ओर, सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने इन दलीलों का विरोध करते हुए अदालत से याचिका खारिज करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत मंगलवार को अपना निर्णय सुना सकती है।
यह मामला मंडी गोबिंदगढ़ के कारोबारी आकाश बत्ता की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक आपराधिक मामले में गिरफ्तारी का डर दिखाकर उससे आठ लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए भुल्लर और कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने भुल्लर के चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-40 आवास पर छापेमारी भी की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, वहां से करीब 7.5 करोड़ रुपये नकद, लगभग ढाई किलोग्राम सोना और कई महंगी घड़ियां बरामद हुई थीं। इसके बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग मामला भी दर्ज किया। वहीं, इस प्रकरण से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से कर रहा है।