चंडीगढ़। पंजाबी फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के विवाद के बीच पंजाब में 1980 से 1995 के उग्रवाद काल की घटनाओं की निष्पक्ष पड़ताल के लिए ‘सत्य, जवाबदेही एवं मेल-मिलाप आयोग’ गठित करने की मांग उठी है।
पूर्व आईएएस अधिकारी और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य के उस दौर से जुड़े घटनाक्रमों का तथ्यात्मक और आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए, ताकि अलग-अलग दावों और विवादित कथाओं के बीच सत्य सामने आ सके। डॉ. राजू ने अपने पत्र में कहा कि पंजाब का समाज तब तक पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक उग्रवाद के दौर की घटनाओं को निष्पक्ष, स्वतंत्र और विश्वसनीय प्रक्रिया के माध्यम से दर्ज नहीं किया जाता।
उनके अनुसार आयोग का उद्देश्य किसी से प्रतिशोध लेना नहीं, बल्कि तथ्यों की पुष्टि, राजनीतिक जवाबदेही तय करना और सामाजिक मेल-मिलाप की दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए।
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
इस बीच पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया है कि उनकी मांग पर केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को हटाए जाने की परिस्थितियों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट देगी।