चंडीगढ़। चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले लोगों को मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति की शेष अवधि के दौरान वित्तीय प्रोत्साहन (सब्सिडी) मिलने की संभावना बेहद कम है। हालांकि पिछले वर्ष पात्र वाहनों का कोटा बढ़ाया गया था, लेकिन प्रशासन अब उस व्यवस्था को दोबारा लागू करने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार पहले से कई तरह की रियायतों का लाभ ले रहे हैं और फिलहाल अधिकांश राज्यों में नई इलेक्ट्रिक कारों पर अलग से सब्सिडी नहीं दी जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मौजूदा ईवी नीति अगले वर्ष पूरी होने वाली है। ऐसे में अतिरिक्त सब्सिडी के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए रजिस्ट्रेशन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) के माध्यम से निःशुल्क पंजीकरण जैसी सुविधाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। सितंबर 2022 में लागू पांच वर्षीय ईवी नीति के तहत इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती थी।
प्रस्ताव अभी भी लंबित
सूत्रों के मुताबिक, बढ़े हुए कोटे को लागू करने का प्रस्ताव वित्त विभाग के पास भेजा गया था। वहां से मंजूरी मिलने के बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए गृह मंत्रालय भेजा जाना था, लेकिन प्रस्ताव अभी भी वित्त विभाग में लंबित है। अब माना जा रहा है कि मौजूदा नीति की अवधि समाप्त होने से पहले इसे आगे बढ़ाए जाने की संभावना कम है।
नई नीति पर रहेगा फोकस
प्रशासन का कहना है कि ईवी नीति समाप्त होने के बाद जरूरत के अनुसार नई या संशोधित नीति लाई जा सकती है। वहीं, मौजूदा नीति के तहत अन्य श्रेणियों के पात्र इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को मिलने वाले प्रोत्साहन और सुविधाएं जारी रहेंगी। पिछले वर्ष कोटा बढ़ने के बाद लगभग 250 वाहन मालिकों ने सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। चंडीगढ़ में पिछले लगभग चार वर्षों के दौरान करीब 21 हजार इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है, जिनमें लगभग 7,500 दोपहिया और 4,000 से अधिक इलेक्ट्रिक कारें शामिल हैं।