Summer express, वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। गुरुवार तड़के अमेरिकी सेना ने ईरान के कई नए ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें पहली बार राजधानी तेहरान के आसपास के क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और अधिक गंभीर हो गए हैं।
लगातार हो रहे जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते विवाद ने दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते को लगभग अप्रभावी बना दिया है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात पूर्ण सैन्य संघर्ष की आशंका को और बढ़ा रहे हैं।
तेहरान के आसपास भी हुए हमले
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने तड़के राजधानी तेहरान के आसपास स्थित कई इलाकों को निशाना बनाया। इसके अलावा सेमनान प्रांत में भी हमले किए गए, जहां ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान मौजूद हैं।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि हालिया अमेरिकी हमलों में अब तक 35 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बुधवार को भी अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिससे अभियान की तीव्रता लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
ग्रेटर तुंब द्वीप पर भी अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रेटर तुंब द्वीप पर स्थित ईरानी रक्षा प्रतिष्ठानों और मिसाइल ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
तेल टैंकर पर भी की कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने कुराकाओ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘बेल्मा’ पर भी कार्रवाई की। सेना के अनुसार यह जहाज ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहा था और कई बार चेतावनी देने के बावजूद नहीं रुका। इसके बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज की चिमनी पर मिसाइल दागकर उसे निष्क्रिय कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया था। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा और कच्चे तेल, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिली।
हालांकि, अमेरिका अब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य नहीं कर पाया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू करने का ऐलान किया है।
ईरान की कड़ी चेतावनी
ईरानी संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि यदि अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तो ईरान व्यापक सैन्य टकराव के लिए तैयार है।
वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो पश्चिम एशिया से तेल और गैस के निर्यात को पूरी तरह प्रभावित किया जा सकता है। गार्ड का कहना है कि “या तो इस क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं।”
ट्रंप ने फिर दिया समझौते का संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। पेनसिल्वेनिया स्थित यूएस आर्मी वॉर कॉलेज में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है और समझौते की इच्छा जता रहा है। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की।