Summer express/शिमला/संजू -:सोलन जिले के खील, जशली और आसपास के कई गांवों में कथित अवैध निर्माण, पहाड़ों की कटाई, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और बेनामी जमीन सौदों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने वन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जनहित याचिका सामाजिक संस्था अर्थ हीलर्स की ओर से दायर की गई है। संस्था का आरोप है कि सोलन जिले के खील, जशली, कोरोल, कैंथारी, पड़ज्ञानी, बड़ोग, कुमारहट्टी और आसपास के क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य किए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार एवं किरायेदारी अधिनियम की धारा 118 का उल्लंघन करते हुए बेनामी सौदों के माध्यम से बाहरी लोगों को जमीनें बेची गईं और उन पर बहुमंजिला भवन खड़े किए गए।याचिका में यह भी कहा गया है कि कई स्थानों पर निर्धारित मानकों से अधिक ऊंची इमारतों का निर्माण किया गया है, जिससे पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। संस्था के अनुसार अनियोजित निर्माण के कारण क्षेत्र में पानी, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। साथ ही कुछ भवनों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने के भी आरोप लगाए गए हैं।संस्था की अध्यक्ष एवं अधिवक्ता प्रिया सकलानी का कहना है कि इस मामले की शिकायत पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, वन विभाग और राजस्व विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद संस्था ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
वहीं संस्था के एक सदस्य, जो विजिलेंस विभाग से सेवानिवृत्त हैं, का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बेनामी जमीन सौदों और अवैध निर्माण का सिलसिला जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने पर संस्था के सदस्यों को धमकियों और हमलों का भी सामना करना पड़ा है। इसके बावजूद संस्था ने पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन की मांग को लेकर अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प जताया है।मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत संबंधित विभागों की स्टेटस रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई करेगी।