कांगड़ा /राहुल -:शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की बोह घाटी में बादल फटने और उसके बाद आई भीषण बाढ़ ने कई परिवारों की जिंदगी को गहरे संकट में डाल दिया है। पहाड़ों से आए भारी मलबे और तेज बहाव ने कई घरों, गौशालाओं, पशुधन और लोगों की वर्षों की मेहनत से जुटाई गई संपत्ति को पूरी तरह तबाह कर दिया। प्रभावित परिवार फिलहाल राहत की उम्मीद में प्रशासन और सरकार की ओर देख रहे हैं तथा शीघ्र पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अपनी ओर से प्रत्येक प्रभावित परिवार को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। वहीं शाहपुर से भाजपा नेता कमल शर्मा ने भी पीड़ित परिवारों को 5-5 हजार रुपये के चेक देकर सहयोग किया।प्रभावित महिला सुषमा ने बताया कि जब वह घटनास्थल पर पहुंचीं तो वहां घरों का नामोनिशान तक नहीं बचा था। चारों ओर केवल मलबा और बड़े-बड़े पत्थर दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कई परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं और लोगों के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।पीड़िता राणो देवी ने बताया कि सोमवार सुबह अचानक तेज धमाके के साथ पहाड़ से पानी और मलबा नीचे आया, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। उनके अनुसार बाढ़ में उनका घर, पशुधन और घरेलू सामान बह गया। उन्होंने सरकार से जल्द राहत और स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करने की अपील की।गांव के बुजुर्ग पूर्ण ने बताया कि भारी मात्रा में आए मलबे से गांव को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कई पशु मलबे में दब गए और लोगों की आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं, लेकिन अब प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है।
विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में प्रभावित परिवारों को कपड़े, बर्तन और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं की तत्काल जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित परिवारों को शीघ्र भूमि और आवास सहायता उपलब्ध कराई जाए, मलबा हटाने के लिए पर्याप्त मशीनरी तैनात की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए एसडीआरएफ की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों को जल्द सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।