Summer express, नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में भारी बारिश होने के बावजूद मानसून की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। खासकर खेती पर निर्भर राज्यों में बारिश की कमी अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बीते एक सप्ताह में दिल्ली, हरियाणा और पूर्वी राजस्थान में अच्छी बारिश हुई, जिससे इन क्षेत्रों में बारिश की कमी कुछ कम हुई है। हालांकि, इसका देश के कुल मानसून आंकड़ों पर सीमित असर पड़ा है।
देश में मानसूनी बारिश की कुल कमी 2 अगस्त को 12 प्रतिशत थी, जो 9 अगस्त तक घटकर 11 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश समेत कई कृषि प्रधान राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
12 राज्यों में 20 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी
रविवार तक देश के 12 राज्यों में सामान्य से 20 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई। इनमें बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य भी शामिल हैं, जो मानसून के मुख्य क्षेत्र में आते हैं। इन राज्यों के कई हिस्सों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण खेती काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। ऐसे में बारिश की कमी का सीधा असर फसलों की उत्पादकता और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
बुआई के बाद हुई बारिश से सीमित फायदा
बारिश की कमी के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले दिनों हुई बारिश का बड़ा हिस्सा खरीफ फसलों की बुआई पूरी होने के बाद आया। देश के कुल बोए गए क्षेत्र में करीब 88 प्रतिशत हिस्से में खरीफ फसलों की बुआई पहले ही पूरी हो चुकी थी। ऐसे में बीते सप्ताह हुई बारिश से बुआई क्षेत्र में कमी केवल एक प्रतिशत तक ही कम हो सकी।
धान की स्थिति भी अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस बार धान की बुआई का रकबा करीब चार प्रतिशत कम है।
जलाशयों के लिए बारिश बनी राहत
हालांकि फसलों की बुआई के लिहाज से हाल की बारिश का फायदा सीमित रहा, लेकिन जलाशयों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है। अगस्त में हुई बारिश से जलाशयों में पानी का भंडारण बढ़ने की उम्मीद है। इससे आने वाले समय में पनबिजली उत्पादन को बेहतर समर्थन मिल सकता है। साथ ही अगले फसल मौसम के लिए भी जल उपलब्धता का बैकअप मजबूत होने की संभावना है।
13 अगस्त से इन राज्यों में बढ़ सकती है बारिश
मौसम विभाग के अनुसार 13 अगस्त के आसपास पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। उत्तरी बंगाल की खाड़ी और पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश तट के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई है।
इसके प्रभाव से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में बारिश का दौर तेज हो सकता है। इससे बिहार और झारखंड में धान तथा मक्का जैसी फसलों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा कमी
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य भारत को छोड़कर देश के लगभग सभी हिस्सों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी सबसे अधिक 25 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 17 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत बारिश की कमी रही।
हालांकि आने वाले दिनों में पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधि बढ़ने से कुछ राज्यों में मानसून की स्थिति सुधरने की उम्मीद है। अब किसानों की नजर मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमानों और अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी है।