Summer express, हैदराबाद। तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत करीब 71 लाख मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में आए हैं। ये संख्या राज्य के कुल 3.38 करोड़ मतदाताओं की लगभग 21 प्रतिशत है। गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख 10 अगस्त निर्धारित की गई है। ऐसे में अंतिम दिन बड़ी संख्या में मतदाताओं के फॉर्म जमा होने की संभावना है और इसके बाद सूची से हटाए जाने वाले नामों का आंकड़ा बदल सकता है।
9 अगस्त तक करीब 2.64 करोड़ यानी 78.1 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) द्वारा सत्यापित किए जा चुके थे। वहीं लगभग 3.2 लाख फॉर्म का डिजिटाइजेशन बाकी था। इन फॉर्मों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद असंग्रहीत या सत्यापन से बाहर रहने वाले मतदाताओं की संख्या में बदलाव संभव है।
SIR के दौरान जिन करीब 71 लाख मतदाताओं के नामों को फिलहाल असंग्रहीत श्रेणी में रखा गया है, उनमें लगभग 9.1 लाख मृत मतदाता बताए गए हैं। करीब 10.3 लाख मतदाता अनुपस्थित या संपर्क से बाहर पाए गए, जबकि लगभग 43 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए हैं। इसके अलावा करीब 6.6 लाख नाम दोहरे यानी डुप्लीकेट मतदाताओं के रूप में सामने आए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी सी. सुदर्शन रेड्डी के अनुसार, असंग्रहीत श्रेणी में आने वाले मतदाताओं के नामों को प्रक्रिया के तहत हटाया जा सकता है।
ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में ऐसे मामलों की संख्या सबसे अधिक सामने आई है। हैदराबाद, मेडचल-मलकाजगिरि और रंगारेड्डी जिलों में कुल 41.5 लाख असंग्रहीत फॉर्म दर्ज किए गए हैं। यह राज्य में सामने आए करीब 70.8 लाख असंग्रहीत फॉर्म का लगभग 58.6 प्रतिशत है।
हैदराबाद जिले में 18,45,595 फॉर्म असंग्रहीत मिले हैं, जो जिले के कुल मतदाताओं का 38.96 प्रतिशत है। मेडचल-मलकाजगिरि में 10,62,190 यानी 35.65 प्रतिशत और रंगारेड्डी में 12,41,188 यानी 33.55 प्रतिशत फॉर्म इस श्रेणी में आए हैं। इन तीनों जिलों में राज्य के करीब 33.7 प्रतिशत मतदाता रहते हैं, लेकिन असंग्रहीत फॉर्मों में इनकी हिस्सेदारी 58.6 प्रतिशत है।
शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फॉर्म जमा नहीं होने के पीछे मतदाताओं का दूसरे स्थानों पर पलायन, किराए के मकानों में रहने वाले लोगों का बार-बार पता बदलना, बंद मकान, गेटेड सोसायटियां, मृत मतदाता और स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोगों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
तेलंगाना के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई जिलों में अपेक्षाकृत अधिक विसंगतियां सामने आई हैं। आदिलाबाद में 28.5 प्रतिशत, निजामाबाद में 27.4 प्रतिशत, निर्मल में 26.1 प्रतिशत, मेदक में 24.6 प्रतिशत, कामारेड्डी में 23.9 प्रतिशत और संगारेड्डी में 23.8 प्रतिशत मतदाताओं से संबंधित मामलों में विसंगति दर्ज की गई है।
विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में भी आदिलाबाद में 30.4 प्रतिशत, नारायणखेड़ में 29.3 प्रतिशत, निजामाबाद अर्बन में 28.4 प्रतिशत, शादनगर में 28.3 प्रतिशत, निर्मल में 28.29 प्रतिशत और निजामाबाद ग्रामीण में 28.1 प्रतिशत की विसंगति दर सामने आई है।
SIR प्रक्रिया के अंतिम चरण में अब सभी की नजर 10 अगस्त की समय-सीमा पूरी होने के बाद सामने आने वाले आंकड़ों पर है। फॉर्मों के डिजिटाइजेशन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम वास्तव में मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया में जाएंगे और कितने मतदाताओं का रिकॉर्ड सत्यापन के बाद बरकरार रहेगा।