Summer express/मंडी, धर्मवीर-:छोटी काशी मंडी इन दिनों हिमाचल के ग्रामीण हुनर और स्थानीय उत्पादों की खुशबू से महक रही है। ऐतिहासिक सेरी मंच पर नाबार्ड के सौजन्य से पांच दिवसीय प्रदर्शनी एवं बिक्री मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले में प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण संस्थाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद बिक्री के लिए पहुंचाए गए हैं। खास बात यह है कि यहां लोगों को पहाड़ी पारंपरिक उत्पादों से लेकर हर्बल और प्राकृतिक उत्पादों तक की पूरी रेंज देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर शुरू हुए इस आयोजन का मकसद स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं को बाजार उपलब्ध करवाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
मंडी के ऐतिहासिक सेरी मंच पर सजी यह प्रदर्शनी हिमाचल की लोकल प्रतिभा और पारंपरिक हुनर की तस्वीर पेश कर रही है। यहां चंबा के पांगी से लेकर कुल्लू और सोलन तक के उत्पादकों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। हथकरघा से तैयार शॉल, पट्टू, जुराबें और सजावटी सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, तो वहीं हर्बल उत्पाद और स्थानीय वन उपज भी खूब पसंद की जा रही है।पांगी से पहुंचे किसान कोऑपरेटिव सोसायटी के संचालक डेम चंद अपने साथ जंगलों में मिलने वाले कई प्राकृतिक उत्पाद लेकर आए हैं। इनमें पांगी की प्रसिद्ध ठांगी भी शामिल है। उनके मुताबिक ठांगी को पारंपरिक तौर पर जोड़ों और घुटनों के दर्द सहित कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में उपयोग किया जाता है। करीब 100 ग्राम ठांगी की कीमत 500 रुपये है। उनके साथ पांगी क्षेत्र की करीब 45 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं जुड़ी हैं, जो शहद, जीरा, रत्नजोत सहित करीब 45 तरह के स्थानीय उत्पाद तैयार कर रही हैं।
सोलन से पहुंची स्वयं सहायता समूह संचालक लीला ठाकुर के स्टॉल पर भी प्राकृतिक और हर्बल उत्पादों की अच्छी मांग देखने को मिल रही है। करीब 20 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं मिलकर साबुन, धूप और अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को तैयार करने में रसायनों का इस्तेमाल न करने का दावा किया जा रहा है, जिसके चलते मंडी के लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।
वहीं कुल्लू से पहुंचे बुनकर एवं सोसायटी संचालक करतार चंद ने बताया कि उनकी सोसायटी के साथ करीब 50 बुनकर काम कर रहे हैं। ये बुनकर गर्म ऊनी वस्त्रों के साथ-साथ सजावटी सामान भी तैयार करते हैं। नाबार्ड के साथ जुड़ने के बाद कारीगरों को घर के पास रोजगार के अवसर मिलने के साथ अपने उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदर्शनियों के जरिए बाजार भी उपलब्ध हो रहा है।
गौरतलब है कि 7 अगस्त को देशभर में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। इसी कड़ी में स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए प्रदर्शनी एवं बिक्री मेलों का आयोजन किया जा रहा है। मंडी में आयोजित यह मेला न केवल हिमाचल की पारंपरिक कला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रभावी मंच भी बन रहा है। मेले में उमड़ रही खरीदारों की भीड़ से साफ है कि हिमाचल के लोकल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और लोकल फॉर वोकल का संदेश जमीन पर भी असरदार दिखाई दे रहा है।