Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़। चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के कानूनों के लागू होने को लेकर लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब ने शहर के प्रशासनिक और राजनीतिक संबंधों पर नई बहस छेड़ दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लोकसभा में बताया है कि वर्तमान में चंडीगढ़ में पंजाब के 238 अधिनियम और हरियाणा के केवल सात अधिनियम लागू हैं। यह जानकारी चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के अतारांकित प्रश्न के जवाब में दी गई है।
मनीष तिवारी ने लोकसभा में मिले इस जवाब को अपने स्तर पर साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या कानूनों के इस अनुपात से यह संकेत मिलता है कि चंडीगढ़ का राजनीतिक संतुलन आखिर किस ओर झुका हुआ है? उन्होंने इसे चौथे स्तंभ के सदस्यों के लिए विचार करने योग्य प्रश्न बताया है।
गृह मंत्रालय के जवाब के अनुसार, चंडीगढ़ में लागू पंजाब के कानूनों में पुराने राजस्व, भूमि, नगर नियोजन, कृषि, शिक्षा, श्रम, पुलिस, कराधान और अन्य क्षेत्रों से जुड़े कानून शामिल हैं। सूची में द कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1952, पंजाब न्यू कैपिटल (पेरीफेरी) कंट्रोल एक्ट, 1952, पंजाब म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, 1976, पंजाब पुलिस एक्ट, 2007 और पंजाब राइट टू सर्विस एक्ट, 2011 जैसे कानून भी शामिल हैं।
वहीं, चंडीगढ़ में लागू हरियाणा के सात कानूनों में हरियाणा हाउसिंग बोर्ड एक्ट, 1971, हरियाणा प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट, 1971, हरियाणा एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट, 1974, हरियाणा रिलीफ ऑफ एग्रीकल्चरल इंडेब्टेडनेस एक्ट, 1976, हरियाणा कंपल्सरी रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिजेज एक्ट, 2008, हरियाणा बैकवर्ड क्लासेज एक्ट, 2016 और हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट, 2022 शामिल हैं।
पिछले पांच वर्षों में भी पंजाब के कानूनों का दबदबा
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि पिछले पांच वर्षों में चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा के कई कानून लागू किए गए हैं। इनमें पंजाब शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2025, कॉन्ट्रैक्ट लेबर और इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स से जुड़े पंजाब संशोधन कानून, पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ह्यूमन स्मगलिंग एक्ट, पंजाब अबादी देह (रिकार्ड ऑफ राइट्स) एक्ट, 2021 और पंजाब राइट टू बिजनेस एक्ट, 2020 शामिल हैं।
जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 केंद्र सरकार को किसी राज्य में लागू अधिनियम को अधिसूचना के माध्यम से चंडीगढ़ में लागू करने की शक्ति देती है। कानूनों को लागू करने के प्रस्ताव चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से स्थानीय जरूरतों के आधार पर शुरू किए जाते हैं। केंद्र ने यह भी कहा है कि किसी अलग समान नीति की जरूरत नहीं है और प्रत्येक कानून को उसकी जरूरत, उद्देश्य और कानूनी प्रभाव के आधार पर अलग-अलग परखा जाता है।
आंकड़ों का यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंडीगढ़ को लेकर पंजाब और हरियाणा के दावों की राजनीतिक बहस लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में 238 बनाम 7 कानूनों का अनुपात निश्चित रूप से राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श को नई सामग्री देता है।