Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-: हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेंशन एरियर की अदायगी को लेकर 18 अगस्त को जारी नोटिफिकेशन पर पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने कड़ा विरोध जताया है। धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने पेंशनरों की लंबित मांगों को लेकर जारी अधिसूचना में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द कमियां दूर नहीं करती है तो पेंशनर विधानसभा का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।सुरेश ठाकुर ने कहा कि नोटिफिकेशन में केवल पेंशन एरियर की अदायगी का उल्लेख किया गया है, जबकि वेतन एरियर, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और कम्यूटेशन की लंबित राशि को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की विभिन्न लंबित अदायगियों का मामला लंबे समय से सरकार के समक्ष उठाया जा रहा है, लेकिन अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सुरेश ठाकुर ने पेंशनरों को क्लास-1, क्लास-2 और क्लास-3 के आधार पर वर्गीकृत किए जाने पर भी आपत्ति जताई। ठाकुर ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सभी पेंशनर समान हैं और इस तरह का वर्गीकरण उन्हें अलग-अलग वर्गों में बांटने जैसा है। उन्होंने 40 हजार रुपये बेसिक पेंशन की शर्त पर भी सवाल उठाते हुए इसे पेंशनरों के हितों के खिलाफ बताया।प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि पेंशनरों की चार सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि 13 मई 2026 को सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पेंशनरों में रोष है।ठाकुर ने बताया कि 8 अगस्त को सोलन में हुई बैठक में अक्टूबर के पहले सप्ताह से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि 21 अगस्त से विधानसभा सत्र शुरू होने के चलते आंदोलन की समयसीमा में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए ज्वाइंट एक्शन कमेटी से जुड़े 18 प्रमुख संगठनों की बैठक बुलाई जा रही है, जिसमें आगामी रणनीति तय होगी।उन्होंने कहा कि आंदोलन जिला स्तर पर चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर विधानसभा का घेराव भी किया जा सकता है। पेंशनर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने स्पष्ट किया कि यह सांकेतिक या एक दिन का आंदोलन नहीं होगा, बल्कि लंबित मांगों और अदायगियों का समाधान होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा।