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ऑपरेशन सिंदूर के बाद अटकी शादियों को मिली राह, 150 से ज्यादा पाकिस्तानी दुल्हनें भारत पहुंचीं

समर न्यूज | अमृतसर
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच लंबे समय से अटकी अंतरदेशीय शादियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत की कम से कम 150 से ज्यादा सिंधी महिलाएं, जिनकी शादी भारत में तय हुई थी, अब अपने भारतीय जीवनसाथियों के पास पहुंच चुकी हैं। इन महिलाओं और उनके परिवारों को भारत आने के लिए वीजा मिलने के बाद उन्होंने हवाई मार्ग से तीसरे देशों के रास्ते भारत की यात्रा की। इससे उन परिवारों की चिंता दूर हुई है, जिनकी बेटियां महीनों से विवाह के लिए भारत आने का इंतजार कर रही थीं।
सिंधी समुदाय से जुड़े नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता राजेश झांबिया के अनुसार, वर्षों से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के परिवार अपनी बेटियों की शादी भारत में करने के लिए वाघा-अटारी सीमा के रास्ते आसानी से आते-जाते थे। विवाह के लिए आने वाले लोगों को वीजा और सड़क मार्ग की सुविधा मिल जाती थी। लेकिन 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद बढ़े तनाव के कारण अटारी मार्ग से पाकिस्तानी नागरिकों की आवाजाही पर रोक लग गई। इससे कम से कम 150 तय शादियां अधर में लटक गईं। इन महिलाओं को विशेष अनुमति के तहत हवाई मार्ग से भारत आने की मंजूरी मिली। अप्रैल से अब तक करीब 150 दुल्हनें परिजनों के साथ दुबई, ओमान, श्रीलंका के रास्ते पहुंचीं।

झांबिया ने बताया कि विवाह की तारीखें निकलने और परिवारों में बढ़ती चिंता के बाद इस मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी में स्थित शदानी दरबार से जुड़े संत युधिष्ठिरलाल शदानी की मदद ली गई। मंदिर प्रबंधन ने भारत में विवाह के लिए आने वाली पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष रखी और उनके तथा परिजनों के लिए वीजा जारी करने का आग्रह किया। बताया गया कि सूची में करीब 150 महिलाओं के नाम थे। इनकी शादियां नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और भारत के कुछ अन्य शहरों में तय थीं। प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने इन महिलाओं और उनके परिजनों को भारत आने की अनुमति दी, लेकिन उन्हें हवाई मार्ग से यात्रा करने की शर्त रखी गई। इस व्यवस्था से अटारी सीमा बंद होने के बावजूद विवाह के रास्ते खुले।
{तीसरे देशों से भारत पहुंचीं: अप्रैल से अब तक ये दुल्हनें और उनके परिवार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मार्गों से भारत पहुंच चुके हैं। इनमें दुबई, ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों के रास्ते शामिल हैं। कुछ परिवारों ने अलग-अलग देशों में विमान बदलकर भारत की यात्रा पूरी की। इस तरह सीधे अटारी सीमा से आने की सुविधा बंद होने के बावजूद वैकल्पिक हवाई मार्गों से विवाह की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी। नागपुर से जुड़े करीब 15 मामलों में पाकिस्तानी दुल्हनों के भारत पहुंचने की जानकारी सामने आई है। बाकी महिलाएं भारत के अलग-अलग शहरों में अपने होने वाले पति और परिवारों के पास गई हैं। इस घटनाक्रम को दोनों देशों के बीच तनाव के बीच मानवीय रिश्तों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है।
{अभी 300 महिलाओं को इंतजार: हालांकि, यह राहत सभी परिवारों तक नहीं पहुंची है। समुदाय से जुड़े लोगों के अनुसार पाकिस्तान में अभी करीब 300 और महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी शादी भारत में तय है और वे वीजा मिलने का इंतजार कर रही हैं। इन परिवारों की ओर से भी भारत सरकार से इसी तरह मानवीय आधार पर वीजा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इस बीच, भारत-पाकिस्तान के बीच सामान्य आवाजाही अभी पहले जैसी
नहीं हुई है।
अटारी-वाघा मार्ग पर लगी पाबंदियों के कारण तीसरे देशों के रास्ते यात्रा करना इन परिवारों के लिए महंगा और जटिल विकल्प है। इसके बावजूद जिन 150 परिवारों की शादियां आगे बढ़ सकीं, उनके लिए यह रास्ता लंबे इंतजार के बाद उम्मीद लेकर आया है।
{रिश्तों के बीच सीमा बनी बाधा: सिंधी समुदाय के लोगों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन के बाद से दोनों देशों के परिवारों में वैवाहिक रिश्ते बने रहे हैं। खासकर सिंध से भारत आने वाले परिवारों के लिए अटारी मार्ग विवाह संबंधों का प्रमुख रास्ता रहा है। मौजूदा तनाव ने इन पारिवारिक रिश्तों की आवाजाही को प्रभावित किया, लेकिन वीजा की अनुमति मिलने के बाद कई परिवारों को अपने रिश्ते को विवाह में बदलने का अवसर मिला है।
{आगे भी वीजा की उम्मीद: अब समुदाय की नजर उन करीब 300 महिलाओं पर है, जो अभी पाकिस्तान में हैं। उनके परिवार चाहते हैं कि सरकार सुरक्षा और जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें भी भारत आने की अनुमति दे। इससे लंबित विवाहों को पूरा करने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल 150 महिलाओं का भारत पहुंचना यह दिखाता है कि राजनीतिक तनाव के बीच भी मानवीय और पारिवारिक रिश्तों के लिए सीमित स्तर पर रास्ते निकाले
जा सकते हैं।

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