10 एकड़ में काटी जा रही अवैध कॉलोनी
गुरमीत सिंह | डेराबस्सी
समर न्यूज
डेराबस्सी-बेहड़ा रोड पर पर काटी जा रही दो अलग-अलग अवैध कॉलोनियों का मामला सामने आने के बाद गमाडा विभाग हरकत में आ गया है। गमाडा के जेई बलकरण सिंह ने टीम के साथ बुधवार को थापर यूनिवर्सिटी के पास तथा फैक्टरी वाली जगह पर काटी जा रही कॉलोनी का निरीक्षण किया।
जेई ने बताया कि यूनिवर्सिटी के पास चल रहे काम को बंद करवा दिया गया है और जल्द ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार इन कॉलोनियों को काटने के लिए कोई मंजूरी नहीं ली गई है। मामले में कॉलोनियों की रजिस्ट्रियों के दौरान जमीन की किस्म और सरकारी फीस को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यदि एक एकड़ जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर रजिस्ट्री करवाई जाए तो करीब 3.30 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी और 1.30 लाख रुपये सरकारी फीस बनती है। यानी कुल राशि करीब 4.60 लाख रुपये होती है। वहीं, इसी जमीन को इंडस्ट्रियल जोन के अनुसार दर्ज करने पर 6 प्रतिशत के हिसाब से स्टांप ड्यूटी करीब 14.64 लाख रुपये और सरकारी फीस करीब 5.60 लाख रुपये बनती है। इस तरह कुल राशि करीब 19.75 लाख रुपये तक पहुंचती है। दोनों दरों में करीब 15.15 लाख रुपये का अंतर है। यदि 10 एकड़ जमीन की रजिस्ट्रियों में इंडस्ट्रियल जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर कम फीस जमा करवाई गई है तो सरकारी खजाने को करीब 1.51 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि वास्तविक नुकसान जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
आरोप है कि बेहड़ा रोड पर सैकड़ों एकड़ जमीन पर कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। कृषि भूमि को इंडस्ट्रियल प्लॉट बनाकर बेचने और रजिस्ट्रियों में कृषि भूमि दर्ज करवाने के मामलों की निष्पक्ष जांच हो तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। तहसीलदार बीर करण सिंह ने बताया कि कॉलोनियों से रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। वहीं, गमाडा द्वारा मौके पर काम बंद करवाए जाने के बाद अब देखना होगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।