Summer express/हमीरपुर, अरविंद-: केंद्र सरकार की ओर से जारी यूजीसी की नई गाइडलाइन के विरोध में शनिवार को हमीरपुर शहर में सामान्य वर्ग के लोगों ने रैली निकालकर जोरदार प्रदर्शन किया। भोटा चौक से शुरू हुई रैली गांधी चौक तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने नई गाइडलाइन को एकतरफा बताते हुए इसे वापस लेने की मांग उठाई। इस दौरान पूरा शहर ‘यूजीसी रोल बैक’ और ‘जय भवानी, जय जवानी’ के नारों से गूंज उठा।गांधी चौक पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सामान्य वर्ग में भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है। केवल सामान्य वर्ग से संबंधित होने के कारण उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए, ताकि वास्तव में जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सके।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों से गरीब और जरूरतमंद वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। उनका कहना था कि जाति आधारित आरक्षण का लाभ समाज के सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से ऐसी नीतियां बनाने की मांग की, जिनमें जातिगत पहचान के बजाय आर्थिक स्थिति और जरूरत को प्राथमिकता दी जाए।सभा के दौरान एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लंबे समय से लागू इस कानून के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं और इसे रोकने के लिए प्रभावी प्रावधान किए जाने चाहिए। उन्होंने सरकार से यूजीसी की नई गाइडलाइन पर पुनर्विचार करने और विभिन्न वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीति बनाने की मांग की।जिला राजपूत कल्याण सभा के अध्यक्ष जोगिंद्र ठाकुर ने कहा कि यूजीसी की नई गाइडलाइन के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सामान्य वर्ग के लोग शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर यूजीसी गाइडलाइन को वापस लेने की मांग की। उन्होंने दोहराया कि आरक्षण जातिगत आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में बनने वाली नीतियों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
भाजपा के पूर्व विधायक नरेंद्र ठाकुर ने भी आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में विचार होना चाहिए और सामान्य वर्ग के लोगों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर वोट मांगना समाज को बांटने वाला कदम है। आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति होने से जरूरतमंद और योग्य व्यक्ति को इसका लाभ मिल सकेगा।प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने सामान्य वर्ग के सांसदों और विधायकों से भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आने वाले चुनाव दूर नहीं हैं और उनकी मांगों की अनदेखी करने वालों को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।