Summer express/सोलन /भूपेंद्र-:देश को आजाद हुए 80 वर्ष पूरे होने के बावजूद घरोट पंचायत के आंजी गांव के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों और जरूरी कामों के लिए करीब एक घंटे का पैदल सफर तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी मुश्किल हो जाता है।सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आती है, जब गांव में कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाता है। हाल ही में एक महिला की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उसे कंधों पर उठाकर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ा। करीब सात से आठ ग्रामीणों ने महिला को कंधे पर उठाकर सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे उपचार के लिए आगे ले जाया गया। इस घटना ने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं और सड़क संपर्क की वास्तविक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से प्रशासन और सरकार के समक्ष उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सड़क के अभाव में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि जिला मुख्यालय और पंचायत क्षेत्र के अपेक्षाकृत नजदीक होने के बावजूद उनका गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है। किसी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है और समय पर उपचार मिलना भी मुश्किल हो जाता है।अब ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए गांव तक जल्द सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही परेशानी का स्थायी समाधान हो सके। आंजी गांव की यह जमीनी हकीकत विकास के दावों पर भी सवाल खड़े करती है।