Summer express, हिसार। हरियाणा में इस बार मानसून के तीसरे महीने अगस्त में बारिश सामान्य से कम रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में प्रदेश में कुल 138.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 146.1 मिलीमीटर होती है। इस लिहाज से अगस्त में सामान्य से करीब 5 फीसदी कम बारिश हुई। वहीं, पिछले साल अगस्त की तुलना में इस बार बारिश में 28.8 फीसदी की कमी दर्ज की गई। अगस्त 2025 में प्रदेश में 194.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
पिछले दो वर्षों की तुलना में इस बार अगस्त में बारिश का आंकड़ा काफी नीचे रहा। अगस्त 2024 में 186.6 मिलीमीटर और 2025 में 194.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इससे पहले 2023 में 59 मिलीमीटर, 2022 में 70.2 मिलीमीटर, 2021 में 82 मिलीमीटर, 2020 में 138 मिलीमीटर और 2019 में 103 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी अधिक रही। करनाल में सामान्य से 68 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। जींद में 51 फीसदी, कैथल में 49 फीसदी, भिवानी में 41 फीसदी, अंबाला में 37 फीसदी, महेंद्रगढ़ में 27 फीसदी, पलवल में 26 फीसदी, नूंह में 25 फीसदी और सिरसा व फतेहाबाद में 24-24 फीसदी बारिश की कमी रही। दूसरी ओर, कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश भी दर्ज की गई। फतेहाबाद में सामान्य से 24 फीसदी अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
प्रति चक्रवात के कारण कमजोर पड़ा मानसून
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान के ऊपर बने प्रति चक्रवाती परिसंचरण के कारण हरियाणा में मानसून कमजोर हुआ है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के मुताबिक फिलहाल प्रदेश के उत्तरी जिलों में ही बारिश की गतिविधियां अधिक देखने को मिल रही हैं, जबकि पश्चिमी, दक्षिणी और मध्य हरियाणा के कई हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में बने प्रति चक्रवात के कारण हवाओं का रुख प्रभावित हुआ है। इससे हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ी हैं और तापमान में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में मानसून की ट्रफ उत्तरी जिलों के आसपास बनी हुई है, जिसके कारण उन्हीं क्षेत्रों में बारिश का असर अधिक दिखाई दे रहा है।
दो सितंबर के बाद सक्रिय हो सकता है मानसून
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार करीब दो सितंबर के आसपास राजस्थान के ऊपर बना प्रति चक्रवात कमजोर पड़ सकता है। इसके बाद हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में दक्षिण-पूर्वी मानसूनी हवाओं को मजबूती मिलने की संभावना है। साथ ही उत्तरी मध्य प्रदेश, दक्षिणी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान के आसपास कम दबाव क्षेत्र के प्रभाव से भी मौसम में बदलाव के संकेत हैं।
तीन सितंबर के आसपास उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से हरियाणा, एनसीआर और दिल्ली में 3 से 6 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान व्यापक भारी बारिश की संभावना कम है। सितंबर के तीसरे सप्ताह से प्रदेश में मानसून की विदाई का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।