Summer express/शिमला/ संजू -:शिक्षक दिवस से ठीक पहले हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में है। न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के विरोध में प्राथमिक शिक्षक पिछले 40 दिनों से शिक्षा निदेशालय के बाहर क्रमिक अनशन पर बैठे हैं। शिमला के चौड़ा मैदान में हुए प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद अब शिक्षक सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। संगठन ने उम्मीद जताई है कि 5 सितंबर तक उनकी मांगों पर सरकार ठोस निर्णय लेगी। हालांकि, फैसला नहीं होने की स्थिति में शिक्षकों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।
हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के संयुक्त सचिव दीप कुमार ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर कांगड़ा के बनखंडी से न्याय पदयात्रा शुरू की गई थी। इस दौरान पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, अनुबंध शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी समर्थन मिला।उन्होंने कहा कि 26 जुलाई को शिमला के चौड़ा मैदान स्थित अंबेडकर चौक में बड़ा धरना-प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं मौके पर पहुंचे थे और शिक्षकों की मांगों को लेकर सकारात्मक आश्वासन दिया था। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इन मांगों को 5 सितंबर से पहले पूरा करने की बात कही थी।दीप कुमार ने कहा कि सरकार को कर्मचारी हितैषी सरकार माना जाता है और शिक्षकों को उम्मीद है कि न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम से जुड़े मुद्दे का भी जल्द समाधान किया जाएगा। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था के कारण प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के साथ हुई बैठक में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और सीखने के स्तर को लेकर भी चर्चा हुई थी। प्राथमिक शिक्षकों का दावा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बच्चों की अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर और कई स्तरों पर अतिरिक्त प्रयास करते हुए प्राथमिक शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।उन्होंने बताया कि घुमारवीं में आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों शिक्षकों ने एकसूत्रीय प्रस्ताव पारित किया था। इसी प्रस्ताव के तहत पिछले 40 दिनों से क्रमिक अनशन जारी है।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री द्वारा चौड़ा मैदान में किए गए आश्वासनों पर भरोसा जताते हुए कहा है कि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से प्रस्तावित बैठक में देरी और प्राथमिक शिक्षा से सीधे तौर पर संबंधित नहीं होने वाले अन्य संगठनों को बुलाए जाने पर संगठन ने नाराजगी जताई है।दीप कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो राज्य कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संगठन ने संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।