summer express , कुरुक्षेत्र। हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के प्रधान जगदीश सिंह झींडा के खिलाफ कमेटी सदस्यों का धरना शुक्रवार को भी कुरुक्षेत्र स्थित HSGMC मुख्यालय के बाहर जारी रहा। अंबाला से आए कमेटी सदस्य गुरतेज सिंह के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शन को अन्य सदस्यों और संगत का भी समर्थन मिल रहा है। प्रदर्शनकारी प्रधान जगदीश सिंह झींडा के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
धरना स्थल पर HSGMC के सीनियर मीत प्रधान गुरमीत सिंह रामशरण भी पहुंचे। उन्होंने कमेटी के कामकाज और प्रधान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन किया। रामशरण ने कहा कि प्रधान की ओर से कमेटी से जुड़े कई मामलों को लेकर घोषणाएं और वादे किए गए थे, लेकिन उनमें से कई अब तक धरातल पर लागू नहीं हुए हैं। इससे कमेटी के सदस्यों और संगत में नाराजगी बढ़ रही है।
दीदार सिंह नलवी ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर गुरतेज सिंह की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कमेटी की कार्यप्रणाली को लेकर संगत के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह विरोध केवल किसी एक सदस्य की नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि कमेटी के कामकाज को लेकर संगत में बढ़ते असंतोष को भी दर्शाता है।
गुरमीत सिंह रामशरण ने प्रधान जगदीश सिंह झींडा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि उन्हें प्रधान की कुर्सी इतनी प्रिय है तो वह उसे अपने घर ले जाकर रख लें, लेकिन प्रधान पद से इस्तीफा दे दें। उन्होंने कहा कि HSGMC का गठन सिख धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के लिए हुआ है और इसकी जिम्मेदारी प्रधान की है।
रामशरण ने कहा कि हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के गठन के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया गया था। सिख धार्मिक संस्थानों के बेहतर प्रबंधन और स्वतंत्र व्यवस्था की मांग को लेकर हुए संघर्ष के बाद हरियाणा में अलग कमेटी अस्तित्व में आई। उनका आरोप है कि वर्तमान में कमेटी अपने उद्देश्यों के अनुरूप अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रही है।
उन्होंने अंबाला में जग्गी सिटी सेंटर के पास जीटी रोड पर हुए घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठाए। रामशरण ने कहा कि संबंधित व्यक्ति की ओर से माफी मांगने और उसके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद सिख पक्ष की स्थिति स्पष्ट हो गई थी। इसके बावजूद मामले को दोबारा तूल दिया गया और जीटी रोड पर संगत को एकत्रित किया गया।
उन्होंने कहा कि स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। रामशरण ने सवाल उठाया कि जब मामला माफी और पुलिस कार्रवाई के बाद सुलझ गया था तो उसे दोबारा इतना बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि संगत को आखिर किस उद्देश्य से जीटी रोड पर बुलाया गया था।
रामशरण ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत पद या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है। उनकी मांग कमेटी के कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और किए गए वादों को पूरा करने की है। प्रदर्शनकारियों ने भी कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक HSGMC मुख्यालय के बाहर धरना जारी रहेगा।