Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला -:कांगड़ा जिले में सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। विभाग का फोकस अब सिर्फ लोगों को जागरूक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने पर भी जोर दिया जा रहा है। 19 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस के मौके पर जिलेभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश भारती के मुताबिक, जिले में मई महीने से सर्पदंश को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत लोगों को सांप से बचाव, सर्पदंश की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचने और झाड़-फूंक जैसी गलत प्रथाओं से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
डॉ. भारती ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के कम्युनिटी रेडियो के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में भी लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचाया जाएगा। अभियान में बेहतर काम करने वाले ब्लॉकों और स्वास्थ्य संस्थानों को ICMR और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सम्मानित किया जाएगा।सर्पदंश को अधिसूच्य रोग बनाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग के पास इसके मामलों और मौतों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से पहुंचना शुरू हुआ है।CMO के अनुसार, कांगड़ा में मई से शुरू हुए अभियान के बाद जून और जुलाई में सर्पदंश के मामलों और इससे होने वाली मौतों में कमी देखने को मिली। इस अवधि में जिले में करीब दो से तीन मौतें दर्ज हुई हैं।स्वास्थ्य विभाग ने अब जिले के PHC स्तर तक एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की है। नूरपुर ब्लॉक का उदाहरण देते हुए CMO ने बताया कि पहले कई मरीजों को एंटी-स्नेक वेनम दिए बिना ही बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता था। अब PHC और CHC स्तर पर ही उपचार शुरू होने से मरीजों को शुरुआती समय में जरूरी इलाज मिल पा रहा है।WHO ने वर्ष 2030 तक सर्पदंश से होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है। वहीं कांगड़ा स्वास्थ्य विभाग इससे आगे बढ़कर जिले को सर्पदंश से होने वाली मौतों से मुक्त बनाने का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है।