मरीज की मौत के बाद परिजनों के गंभीर आरोप
दो लाख रुपये मांगने का दावा; अस्पताल ने आरोपों को बताया निराधार
Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-: कांगड़ा जिले के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मरीज की मौत के बाद मामला विवादों में आ गया है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि मरीज की मौत के बाद शव सौंपने के एवज में उनसे दो लाख रुपये की मांग की गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि मरीज को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और चिकित्सकीय टीम ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया।मामला एपेक्स हॉस्पिटल एंड हार्ट केयर सेंटर से जुड़ा बताया जा रहा है।
मृतक के परिजन विजय सिंह के अनुसार, वह इंदौरा क्षेत्र से अपनी चाची को उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजन का कहना है कि मरीज को पहले एक अन्य निजी अस्पताल में दिखाया गया था, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे रेफर किया गया।विजय सिंह के मुताबिक अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने मरीज की जांच की और स्टेंट डालने की प्रक्रिया के साथ-साथ संभावित खर्च की जानकारी दी। इसके बाद उपचार शुरू किया गया। परिजन के अनुसार करीब दो से ढाई घंटे तक प्रक्रिया चलने के बाद मरीज को सीसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। इसी दौरान उसकी हालत अचानक बिगड़ गई।परिजन का आरोप है कि जब वह मरीज को देखने के लिए अस्पताल पहुंचे तो वहां अफरा-तफरी का माहौल था। उन्होंने चिकित्सकों से मरीज के बारे में जानकारी ली। विजय सिंह का कहना है कि जब उन्हें मरीज की मौत होने का पता चला तो उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शव सौंपने की मांग की, लेकिन कथित तौर पर उनसे दो लाख रुपये की मांग की गई। परिजन ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अस्पताल ने बताया मरीज की हालत बेहद गंभीर
दूसरी ओर, अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित वर्मा ने सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मरीज सुबह करीब 11 बजे एक निजी अस्पताल से सीने में दर्द की शिकायत के बाद उनके अस्पताल में रेफर होकर आया था। जांच के दौरान ईसीजी में इन्फीरियर वॉल मायोकार्डियल इन्फार्क्शन की स्थिति सामने आई।डॉ. वर्मा के अनुसार मरीज को पहले से शुगर की समस्या थी, उसका हीमोग्लोबिन कम था और क्रिएटिनिन का स्तर करीब दो था। चिकित्सक का कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति और उपचार से जुड़े संभावित जोखिमों के बारे में परिजनों को जानकारी दी गई थी। परिजनों की सहमति के बाद एंजियोग्राफी और आगे की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई।चिकित्सक के मुताबिक एंजियोग्राफी के दौरान मरीज की तीनों प्रमुख कोरोनरी नसों में गंभीर ब्लॉकेज पाए गए। इनमें एक नस पूरी तरह यानी 100 प्रतिशत बंद थी, जबकि दूसरी में करीब 90 प्रतिशत और तीसरी में 70 से 80 प्रतिशत तक ब्लॉकेज था। डॉ. वर्मा ने कहा कि मरीज हाई रिस्क कैटेगरी में था, लेकिन परिजनों की सहमति और मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे बचाने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
सीसीयू में बिगड़ी हालत, करीब आधे घंटे तक चला CPR
डॉ. वर्मा ने बताया कि करीब तीन घंटे की प्रक्रिया के बाद मरीज को सीसीयू में शिफ्ट किया गया। इस दौरान परिजनों को मरीज से मिलने भी दिया गया और उस समय उसने बातचीत की थी।हालांकि करीब आधे घंटे बाद अचानक मरीज को दौरा पड़ा। उसकी ऑक्सीजन सैचुरेशन और ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगा।इसके बाद चिकित्सकीय टीम ने तुरंत सीपीआर शुरू किया और मरीज को वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टर के अनुसार करीब आधे घंटे तक मरीज को बचाने के लिए प्रयास किए गए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। शाम करीब 4 बजकर 5 से 4 बजकर 10 मिनट के बीच मरीज की मौत हो गई।
डॉक्टर बोले- उपचार के दौरान अस्पताल में ही मौजूद था
डॉ. अमित वर्मा ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि मरीज की मौत के बाद वह अस्पताल से चले गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उपचार की पूरी प्रक्रिया के दौरान अस्पताल में मौजूद थे और रात करीब आठ बजे अस्पताल से निकले। उन्होंने कहा कि मरीज की गंभीर स्थिति को लेकर परिजनों को लगातार जानकारी दी जाती रही।
औपचारिक शिकायत के बाद जांच की बात
मामले में कांगड़ा के सीएमओ डॉ. ओमेश भारती ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। फिलहाल उनके कार्यालय में इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत किसी मामले में कार्रवाई के लिए औपचारिक शिकायत आवश्यक है।
सीएमओ ने कहा कि सभी अस्पतालों के लिए निर्धारित एथिकल गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है। यदि किसी अस्पताल में अनैतिक प्रैक्टिस का आरोप है तो संबंधित व्यक्ति स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पुलिस और उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत भी शिकायत कर सकता है। शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल इस मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रबंधन के पक्ष में विरोधाभास सामने आया है। अब औपचारिक शिकायत के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे घटनाक्रम में अस्पताल की ओर से किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।