Summer express/शिमला-: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना को लेकर सरकार द्वारा की जा रही जाँच पर सवाल उठाते हुए प्रदेश में कथित नकली दवाओं के रैकेट और जीएसटी चोरी से जुड़े मामले में विजिलेंस की जाँच से असमर्थता पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि एक ओर हिमकेयर को लेकर सरकार जाँच में पूरी तत्परता दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों की जान से जुड़े नकली दवाओं के कथित रैकेट की जाँच के मामले में विजिलेंस अपनी सीमाएँ गिना रहा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि प्रदेश की जाँच एजेंसी किसी गंभीर वित्तीय एवं आपराधिक मामले की जाँच करने में स्वयं को असमर्थ बता रही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा भी मामले की जाँच की आवश्यकता पर ध्यान दिलाया गया है, ऐसे में जाँच एजेंसी का पीछे हटना कई सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि एक दवा निर्माता पर कथित रूप से नकली दवाओं की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत एक अन्य शिकायत में कथित तौर पर 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी के आरोप भी लगाए गए हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों की विस्तृत और निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के मामलों में विजिलेंस तेजी से कार्रवाई करती है, कार्यालयों में बुलाकर पूछताछ की जाती है और जाँच पूरी होने से पहले ही उससे जुड़े तथ्य सार्वजनिक कर दिए जाते हैं। लेकिन जब मामला कथित नकली दवाओं और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा हो, तो वही एजेंसी जाँच करने में असमर्थता जता रही है।जयराम ठाकुर ने कहा कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने 1 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर मामले की जाँच करने में अपनी असमर्थता जताई थी। ब्यूरो ने कथित तौर पर मामले की जटिल वित्तीय प्रकृति, पर्याप्त मैनपावर एवं संसाधनों की कमी तथा राजस्व विभाग से संबंधित तकनीकी और डोमेन ज्ञान के अभाव को इसका कारण बताया था।उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विजिलेंस और पुलिस विभाग के पास जीएसटी एवं वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए विशेषज्ञता और संसाधन नहीं हैं, तो हिमकेयर से जुड़े मामलों की जाँच के लिए आवश्यक तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञता कहाँ से आ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अलग-अलग मामलों में जाँच के लिए अलग-अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं।जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमकेयर प्रदेश की जनता से जुड़ी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना रही है और इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूर्व सरकार की लोकप्रिय योजनाओं को बदनाम करने के लिए जाँच का सहारा ले रही है, जबकि गंभीर आरोपों वाले अन्य मामलों में कार्रवाई से बच रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नकली दवाओं का मामला सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की निष्पक्ष, विशेषज्ञता आधारित और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित की जाए तथा यदि प्रदेश की एजेंसी के पास पर्याप्त संसाधन या विशेषज्ञता नहीं है तो सरकार किसी सक्षम स्वतंत्र एजेंसी से जाँच करवाए।उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि सरकार की प्राथमिकता वास्तव में भ्रष्टाचार और नकली दवाओं के रैकेट पर कार्रवाई करना है या राजनीतिक आरोपों के आधार पर पूर्व सरकार की योजनाओं को कटघरे में खड़ा करना।