Summer express/ऊना,राकेश-:ऊना में हिमाचल सरकार की ओर से आयोजित एंटी-चिट्टा वॉकथन रैली के दौरान करीब 20 स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों के साथ कुछ अध्यापिकाओं को भी डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
बताया जा रहा है कि स्कूली बच्चे सुबह करीब 8 बजे से ही आयोजन स्थल पर पहुंचना शुरू हो गए थे। कार्यक्रम के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के पहुंचने का निर्धारित समय सुबह 10 बजे था, जबकि मुख्यमंत्री करीब सवा घंटे की देरी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस दौरान बच्चे तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच आयोजन स्थल पर मौजूद रहे।बच्चों के लिए पर्याप्त छांव और पानी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऊना में तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बीच कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचे और बच्चों तथा अध्यापिकाओं का कुशलक्षेम जाना। उन्होंने डॉक्टरों से भी पूरे मामले की जानकारी ली और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में माना कि बढ़ते तापमान और पानी की कमी के कारण बच्चों को डिहाइड्रेशन की समस्या हुई। उन्होंने कहा कि सितंबर के बावजूद ऊना में तापमान काफी अधिक था। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की हालत पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है और सभी के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद है।
वहीं, ऊना सदर से भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने भी अस्पताल पहुंचकर बीमार बच्चों और अध्यापिकाओं का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से बातचीत कर बच्चों की तबीयत और इलाज की जानकारी ली तथा सभी के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।सतपाल सिंह सत्ती ने कार्यक्रम के समय को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऊना में बढ़ते तापमान को देखते हुए उन्होंने पहले ही रैली के समय को लेकर चिंता जताई थी। सत्ती का आरोप है कि उनकी चेतावनी को प्रशासन और सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया, जिसके चलते बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा।हालांकि, भाजपा विधायक ने नशे के खिलाफ आयोजित वॉकथन के उद्देश्य को सही बताया, लेकिन आयोजन के समय और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रदेश सरकार पर नशे के खिलाफ पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप भी लगाया।सत्ती ने कहा कि यदि सरकार नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई चाहती है तो जवाबदेह अधिकारियों की नियुक्ति और मजबूत व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने इस पूरे मामले को विधानसभा में भी उठाने की बात कही।