Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:हिमाचल प्रदेश में इस बार देशभर के शिक्षाविदों का बड़ा जमावड़ा होने जा रहा है। एनआईटी हमीरपुर में तीन दिवसीय शिक्षा महाकुंभ-2026 का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के प्रमुख आईआईटी, एनआईटी, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के करीब 50 कुलपति एवं निदेशक शामिल होंगे। आयोजन में शिक्षा, प्रकृति, नवाचार, कौशल और सतत विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।यह जानकारी हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, एनआईटी हमीरपुर और आईआईटी मंडी के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन का मुख्य विषय ‘शिक्षा, प्रकृति और प्रगति’ रखा गया है।
प्रो. बंसल के अनुसार शिक्षा महाकुंभ का उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री और ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे कौशल, नवाचार और समाज की जरूरतों से जोड़ना है। साथ ही विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण को भी समान महत्व देने पर विचार किया जाएगा।उन्होंने बताया कि यह शिक्षा महाकुंभ की छठी कड़ी है। वर्ष 2023 में पहली बार एनआईटी जालंधर में इसका आयोजन किया गया था। इसके बाद एनआईटी कुरुक्षेत्र, एनआईटी श्रीनगर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और पिछले वर्ष नाइपर मोहाली में शिक्षा महाकुंभ आयोजित हुआ। अब इसकी छठी कड़ी की मेजबानी एनआईटी हमीरपुर करेगा।कुलपति ने कहा कि शिक्षा महाकुंभ केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों और गैप एरिया को चिन्हित कर सुधार की दिशा में ठोस पहल करने का प्रयास किया जाता है। प्रत्येक शिक्षा महाकुंभ के बाद एक थॉट पेपर तैयार किया जाता है, जिसमें चर्चा और सुझावों को संकलित किया जाता है।प्रो. बंसल ने विश्वविद्यालयों में हो रही रिसर्च को समाज तक पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध का लाभ केवल विश्वविद्यालयों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब शोध और नए प्रयोग किसानों तक पहुंचे, तब उनके वास्तविक लाभ सामने आए।उन्होंने कहा कि इसी तरह विश्वविद्यालयों में होने वाले नवाचारों को स्कूल स्तर तक ले जाने की जरूरत है, ताकि विद्यार्थियों में कम उम्र से ही इनोवेटिव माइंडसेट विकसित किया जा सके। स्कूलों और विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत समन्वय बनाने में विद्या भारती जैसी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ज्ञान को प्रज्ञा, प्रज्ञा को नवाचार और नवाचार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना ही शिक्षा महाकुंभ का व्यापक उद्देश्य है।