समर न्यूज | पटियाला
पंजाब कांग्रेस ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत घोषणापत्र तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पटियाला में पार्टी की घोषणापत्र समिति की बैठक हुई, जिसमें विभिन्न सामाजिक, कर्मचारी, कारोबारी और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए। समिति के अध्यक्ष और फतेहगढ़ साहिब से सांसद डॉ. अमर सिंह ने बताया कि बैठक में करीब 21 संगठनों के प्रतिनिधियों ने समस्याएं और मांगें समिति के सामने रखीं।
कई सुझाव लिखित रूप में भी मिले हैं। कांग्रेस ने घोषणापत्र को विभिन्न वर्गों की जरूरतों के आधार पर तैयार करने की योजना बनाई है। बैठक में किसानों, मजदूरों, कारोबारियों, आढ़तियों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। समिति के अनुसार नवंबर के अंत तक घोषणापत्र का मसौदा तैयार कर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजने का लक्ष्य है। इसके बाद दिसंबर के अंत तक इसे औपचारिक रूप से जारी करने की तैयारी है। समिति की ओर से अमृतसर और चंडीगढ़ में बैठकें करने के बाद अब लुधियाना और जालंधर में भी विभिन्न संगठनों से सुझाव लेने की योजना है।
{पंजाब के प्रमुख मुद्दे शामिल: बैठक में नशे, कर्ज, भ्रष्टाचार, प्रदूषण और पेयजल जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। पटियाला क्षेत्र से जुड़े नेताओं ने घग्गर नदी के कारण फसलों को होने वाले नुकसान और इसके स्थायी समाधान की जरूरत भी बताई। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोगों से मिले सुझावों को घोषणापत्र में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। घोषणापत्र की कवायद ऐसे समय हो रही है जब पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और विजय इंदर सिंगला समेत कई नेताओं के नाम नए अध्यक्ष के लिए चर्चा में हैं। पार्टी हाईकमान ने अभी नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
{संगठन मजबूत करने पर जोर: पंजाब कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी स्तर पर बूथ समितियों को सक्रिय करने, स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने तथा विधानसभा क्षेत्रों में नियमित जनसंपर्क बढ़ाने पर चर्चा हो रही है। घोषणा पत्र तैयार करने की प्रक्रिया को इसी संगठनात्मक अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केवल चुनाव के दौरान मुद्दे उठाने के बजाय स्थानीय समस्याओं को लगातार दर्ज किया जाना चाहिए। इसके लिए विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक जुटाने और उसे प्रदेश स्तर पर संकलित करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।