Summer express/शिमला, संजू—: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिरों में रौनक देखने को मिल रही है। कालीबाड़ी मंदिर में मां दुर्गा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। यहां नवरात्र के अवसर पर बंगाल की पारंपरिक कला और धार्मिक आस्था की अनूठी झलक दिखाई दे रही है।मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी पश्चिम बंगाल से आए कलाकार मां दुर्गा की मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में कलाकार पूरी श्रद्धा के साथ जुटे हैं। नवरात्र के दौरान प्रतिमाओं की विधि-विधान से पूजा की जाएगी और दशमी के दिन विसर्जन की परंपरा निभाई जाएगी।
शिमला के ऐतिहासिक कालीबाड़ी मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम जारी है। पश्चिम बंगाल से पहुंचे मूर्तिकार कमल मिट्टी से देवी की आकर्षक प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। कमल के मुताबिक, मूर्ति बनाने की कला उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है। वह इस परंपरा की दूसरी पीढ़ी का हिस्सा हैं और अब उनका बेटा भी इस कला को सीख रहा है, ताकि पारंपरिक विरासत आगे बढ़ती रहे। कमल हर साल शिमला आकर मां दुर्गा की प्रतिमाएं बनाते हैं। उनके लिए यह सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मां के प्रति श्रद्धा और परिवार की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम भी है।
वहीं, कालीबाड़ी मंदिर के पुजारी मुक्ति चक्रवर्ती और गोसाई पंडित जी ने बताया कि नवरात्र के दौरान मां के दर्शन और आशीर्वाद के लिए श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार शुक्र अस्त होने के कारण कुछ मांगलिक कार्यों के लिए समय अनुकूल नहीं माना जा रहा है। विशेष रूप से सोलह संस्कारों और अन्य शुभ कार्यों को लेकर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरती जाती है। हालांकि, व्रत रखना, मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करना, धार्मिक पाठ और हवन जैसे अनुष्ठान जारी रखे जा सकते हैं। पुजारियों ने स्पष्ट किया कि शुक्र अस्त होने से नियमित पूजा-पाठ और मां की उपासना पर कोई रोक नहीं है। मंदिर में श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ मां दुर्गा की आराधना कर रहे हैं।