Summer express, अंकुर कपूर, अंबाला। अंबाला छावनी की अनाज मंडी में तड़के हुई झमाझम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। खुले में पड़ा धान बारिश के पानी से भीग गया, जबकि कुछ धान पानी के साथ नालियों में बहता नजर आया। किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद में देरी, मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों और धान की धीमी लिफ्टिंग के कारण उन्हें लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंडी में पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण उनकी फसल बारिश की चपेट में आ गई।
किसानों के मुताबिक, वे कई दिनों से अपनी धान की फसल लेकर मंडी में बैठे हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं होने और खरीद प्रक्रिया धीमी रहने के कारण उनकी फसल समय पर नहीं खरीदी जा सकी। किसानों का कहना है कि सरकार ने धान की खरीद शुरू करने में देरी की और इसके बाद पोर्टल में बार-बार आने वाली तकनीकी दिक्कतों ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी। मंडी में तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और फसल की लिफ्टिंग धीमी रहने से धान की बोरियां बारिश में भीग गईं।
किसानों ने बताया कि खुले में रखी फसल को बारिश से बचाने के लिए उन्हें खुद ही तिरपाल का इंतजाम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि बारिश के कारण धान को दोबारा सुखाने की जरूरत पड़ेगी, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे। किसानों के अनुसार, सरकार 17 प्रतिशत तक नमी वाले धान की खरीद करने की बात कह रही है, लेकिन बारिश में भीगने के बाद फसल को निर्धारित नमी के स्तर तक लाने के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ेगा।
मंडी में चार दिनों से अपनी फसल लेकर बैठे एक किसान ने बताया कि धीमी खरीद के चलते उसका धान समय पर नहीं उठाया गया। बारिश के दौरान करीब एक क्विंटल धान पानी में बह गया। किसान ने सवाल उठाया कि उसकी फसल को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा। किसानों ने सरकार और मंडी प्रशासन से खरीद प्रक्रिया तेज करने, धान की जल्द लिफ्टिंग कराने और शेड खाली करवाने की मांग की है, ताकि खुले में पड़ी बाकी फसल को खराब होने से बचाया जा सके।
इस मामले में मार्केट कमेटी अंबाला के सचिव नीरज भारद्वाज ने बताया कि जो किसान देरी से फसल लेकर मंडी पहुंचे हैं, उनके रजिस्ट्रेशन में कुछ देरी हुई है। इसके बावजूद किसानों की सुविधा के लिए मैन्युअल पास भी जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आढ़तियों की ओर से तिरपाल की व्यवस्था की गई है, लेकिन अचानक बारिश होने के कारण खुले आसमान के नीचे रखी कुछ फसल भीग गई। उन्होंने बताया कि भीगे हुए धान को सूखने के बाद खरीदा जाएगा।