Summer express/शिमला, संजू -: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में आयोजित ‘हमीर संगम’ कार्यक्रम के बहाने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कार्यक्रम में हजारों छात्रों की भागीदारी और बीजेपी नेताओं की मौजूदगी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा, विधायक आशीष शर्मा और पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। वहीं, हमीरपुर से संबंध रखने वाले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को आमंत्रित नहीं किए जाने का मुद्दा भी चर्चा में रहा।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सिकंदर कुमार ने हमीरपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन को आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से हर साल छात्र एक मंच पर एकत्रित होते हैं और उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा क्षेत्रीय पहचान को समझने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री को न्योता नहीं दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि संभव है कि मुख्यमंत्री उस समय उपलब्ध न हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में किन अतिथियों को आमंत्रित करना है, इसका फैसला स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने लिया था। विश्वविद्यालय के कुलपति रहते कथित गलत भर्तियों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी उन्होंने अपनी बात रखी।
नए जिलों के गठन पर सरकार की मंशा पर सवाल
‘हमीर संगम’ के बीच बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए जिले बनाने की चर्चा करने के बजाय मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी कामकाज को आसान बनाने पर ध्यान देना चाहिए।सुधीर शर्मा ने नए जिलों के गठन की कवायद को जनता का ध्यान भटकाने वाला शगूफा करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने करीब छह महीने का समय निकालने का तरीका खोज लिया है। अब लोग इसी चर्चा में उलझे रहेंगे कि नया जिला कहां बनेगा, कौन-सा क्षेत्र किस जिले में शामिल होगा और लोगों को अपने काम के लिए किस जिले में जाना पड़ेगा।उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य जिलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि आम जनता को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना होना चाहिए। मौजूदा दौर में सूचना प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल कर सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाया जा सकता है। सरकार को स्मार्ट वर्किंग और डिजिटल व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि लोगों के काम बिना अनावश्यक देरी के पूरे हों।
आर्थिक संकट के बीच नए जिलों पर खर्च को लेकर घेरा
बीजेपी विधायक ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले ही आर्थिक चुनौतियों और कर्ज के बोझ का सामना कर रहा है। ऐसे में नए जिलों के गठन पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च होने की आशंका है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इस खर्च के लिए धन कहां से आएगा और प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर इसका क्या असर पड़ेगा।सुधीर शर्मा ने कहा कि जब सड़कों के गड्ढे भरने जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने पर सवाल उठ रहे हैं, तो नए जिलों के गठन के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना आसान नहीं होगा। उन्होंने सरकार पर चुनावी गारंटियां पूरी करने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बजाय नए जिलों की चर्चा में उलझाया जा रहा है।नए जिलों के गठन को लेकर सरकार की कवायद और विपक्ष के सवालों के बीच अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। वहीं, HPU के ‘हमीर संगम’ में मुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किए जाने का मामला भी प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है।