Summer express, रोहतक। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएस) और पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक डॉ. सुरेश कुमार सिंघल की दोबारा नियुक्ति पर रोक लगा दी है। अदालत ने 13 अगस्त को जारी उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है, जिसके तहत डॉ. सिंघल को तीन साल के लिए फिर से निदेशक नियुक्त किया गया था। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि अस्पताल का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए 65 वर्ष से कम आयु के किसी योग्य व्यक्ति को निदेशक का अंतरिम कार्यभार सौंपा जाए। यह व्यवस्था विश्वविद्यालय के लागू नियमों और स्टैच्यूट के अनुसार करनी होगी।
डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति को डॉ. अनिल पन्निकर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि डॉ. सिंघल 31 जुलाई को 65 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें तीन साल के लिए दोबारा नियुक्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता की दलील थी कि विश्वविद्यालय के नियमों के तहत निदेशक के पद पर बने रहने के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष निर्धारित है और इससे छूट देने का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के स्टैच्यूट-3 का हवाला दिया। इसके अनुसार, निदेशक का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है, जिसे नवीनीकृत किया जा सकता है। हालांकि, नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 65 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद निदेशक पद पर नहीं रह सकता, भले ही उसका निर्धारित कार्यकाल पूरा न हुआ हो। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि निर्धारित नियमों और प्रक्रिया से हटकर केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर नियुक्ति नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पदभार संभाल लेने से नियुक्ति से जुड़ी कानूनी खामी दूर नहीं हो जाती। अदालत ने हरियाणा के चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को बताना होगा कि 65 वर्ष की आयु सीमा में छूट किस कानूनी प्रावधान के तहत दी गई और इसके लिए किस सक्षम अधिकारी ने मंजूरी प्रदान की।
अदालत ने सरकार से डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति के आधार, नियुक्ति के लिए की गई सिफारिश और नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारणों से संबंधित रिकॉर्ड भी पेश करने को कहा है। मामले में डॉ. सिंघल को 25 नवंबर 2026 के लिए नोटिस जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने याचिका को एक अन्य लंबित मामले के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
फिलहाल डॉ. सिंघल की दोबारा नियुक्ति के आदेश पर रोक जारी रहेगी। वहीं, अस्पताल के प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार को नियमों के अनुरूप अंतरिम व्यवस्था करनी होगी।