एजेंसी | नई दिल्ली
कम कीमत और आसानी से उपलब्ध होने वाले ड्रोन अब अपराधियों, तस्करों और सशस्त्र संगठनों के लिए नया साधन बनते जा रहे हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों में दर्ज अवैध गतिविधियों के अध्ययन में सामने आया है कि ड्रोन का इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी, जेलों में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने, सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रखने और सैन्य ठिकानों की जासूसी के लिए किया जा रहा है। अगस्त 2026 तक दर्ज 22 घटनाओं में करीब 86 प्रतिशत मामले आपराधिक गतिविधियों से जुड़े थे। यह आंकड़ा सीमित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है, इसलिए इसे क्षेत्र में होने वाली सभी घटनाओं का पूरा आकलन नहीं माना जा सकता।
भारत में पंजाब की पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ, हथियार और गोला-बारूद भेजने के मामले सामने आए हैं। सीमा पार से आने वाले ड्रोन कई बार रात के अंधेरे में खेप गिराकर लौट जाते हैं। सीमा सुरक्षा बल ने 2024 में पंजाब सीमा पर 294 ड्रोन जब्त किए थे। इस खतरे से निपटने के लिए सीमा पर निगरानी और ड्रोन रोधी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालिया रिपोर्टों में भी इस मार्ग से तस्करी की चुनौती बने रहने की बात सामने आई है।
जेलों और तस्करी नेटवर्क में इस्तेमाल
दक्षिण-पूर्व एशिया में मलेशिया की जेलों में ड्रोन से नशीले पदार्थ पहुंचाने के 2024 में 55 मामले दर्ज किए गए थे। इंडोनेशिया की कुछ जेलों में कैदियों और बाहर मौजूद आपूर्तिकर्ताओं के बीच सोशल मीडिया के जरिये संपर्क कर ड्रोन से सामान पहुंचाने के मामले भी सामने आए। तस्कर ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा कर्मियों की गतिविधियां देखने और पकड़े जाने से बचने के लिए भी कर रहे हैं। म्यांमार में सशस्त्र संगठनों के ड्रोन हमलों ने संघर्ष की रणनीति बदल दी है। वहां 600 से अधिक स्थानों पर 2,100 से ज्यादा ड्रोन हमले दर्ज किए गए।