समर न्यूज | मोहाली
पंजाब में सरकारी जमीन के आवंटन को लेकर ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के अनुसार, मोहाली की आईटी सिटी में जमीन अधिग्रहण से प्रभावित लोगों को विस्थापित नीति के तहत आवासीय प्लॉट देने में कई वर्षों तक पुरानी दरें लागू रहीं। इससे पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान है। यह राशि जांच एजेंसी का आकलन है, किसी अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं।
जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के बीच सेक्टर-82 अल्फा में 100 और सेक्टर-66 बीटा में 341 प्लॉट आवंटित किए गए। इस तरह कुल 441 प्लॉट आवंटित हुए। इसके अलावा 169 आवेदन लंबित बताए गए हैं। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन शामिल हैं। विस्थापित नीति का उद्देश्य उन जमीन मालिकों को आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराना है, जिनकी जमीन विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई हो। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन आवंटनों में दरों के निर्धारण और नियमों के पालन की प्रक्रिया की पड़ताल की जा रही है।
25 हजार से बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति गज हुई दर
गमाडा की दरें समय-समय पर बढ़ती रहीं। वर्ष 2018-19 और 2019-20 में दर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज थी। वर्ष 2021-22 में इसे 32,500 रुपये, 2022-23 में 39 हजार रुपये, 2023-24 में 42,900 रुपये और 2024-25 में 51,500 रुपये प्रति वर्ग गज किया गया। वर्ष 2025-26 में यह दर 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई। इसके बावजूद जांच में आरोप है कि विस्थापितों को कई साल तक पुराने रेट पर आवंटन पत्र जारी होते रहे। ईडी इसी अंतर के कारण सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान का आकलन कर रही है।
{2020 की समिति की बैठक भी जांच में: ईडी जून 2020 में हुई समिति की बैठक के फैसलों की भी जांच कर रही है। इसमें गमाडा और पंजाब शहरी विकास प्राधिकरण (पुडा) के वरिष्ठ अधिकारियों, संपदा अधिकारी और कानूनी सलाहकार ने विस्थापितों को प्लॉट आवंटित करने की दरों पर चर्चा की थी। जांच के अनुसार, समिति ने 2013 और 2018 की योजनाओं के सफल आवेदकों को 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज की दर से प्लॉट देने का पक्ष लिया था। साथ ही लंबित आवंटन पत्र 15 दिन के भीतर जारी करने को कहा गया था। ईडी के रिकॉर्ड के मुताबिक, निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
{दस्तावेजों की जांच पर भी सवाल: जांच एजेंसी ने आवेदनकर्ताओं के दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किए बिना उन्हें ड्रॉ में शामिल करने और तय समयसीमा में आशय पत्र जारी नहीं करने जैसी प्रक्रियागत खामियां भी चिह्नित की हैं। पिछले महीने गमाडा के मोहाली कार्यालय में तीन दिन चली तलाशी के दौरान विस्थापित नीति से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए थे।
{सरकार ने रिकॉर्ड देखने की बात कही: पंजाब के आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी और रिकॉर्ड देखने के बाद इसकी जांच की जाएगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मामला जांच के अधीन है। कथित अनियमितताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।