एजेंसी | चंडीगढ़
पंजाब सरकार ने नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निवारक हिरासत से जुड़े अधिकार सौंपे हैं। गृह विभाग की ओर से 21 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के तहत पुलिस आयुक्तों, पुलिस रेंज के महानिरीक्षक (आईजी) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रैंक व उससे ऊपर के अधिकारियों को पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। पहले यह अधिकार मुख्य रूप से राज्य के गृह सचिव के पास था।
इस बदलाव का उद्देश्य नशा तस्करी में शामिल संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया को तेज करना है। अब निर्धारित अधिकार क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारी कानून की शर्तें पूरी होने पर निवारक हिरासत का आदेश दे सकेंगे। यह सामान्य आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से अलग प्रक्रिया है। किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए संबंधित कानून के प्रावधानों और जरूरी कानूनी सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा। यह अधिसूचना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने पंजाब में इस कानून का प्रभावी इस्तेमाल नहीं होने पर सवाल उठाए थे। शाह ने कहा था कि देशभर में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज हुए, जबकि पंजाब में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। हालांकि, राज्य से जुड़ी रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि पिछले महीने तक सात मामलों में निवारक हिरासत के आदेश दिए जा चुके थे। दोनों आंकड़े अलग-अलग दावों पर आधारित हैं।
{छह वरिष्ठ अधिकारियों को भी अधिकार: सरकार ने छह वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को भी विशेष अधिकार दिए हैं। इनमें एएस राय, गौतम चीमा, नौनिहाल सिंह, शिवे वर्मा, कौस्तुभ शर्मा और एस. भूपति शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक इन अधिकारियों के कार्यक्षेत्र तय करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि पहले हिरासत के प्रस्ताव गृह सचिव के पास मंजूरी के लिए महीनों लंबित रह सकते थे। नई व्यवस्था से प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम का उद्देश्य नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए निवारक हिरासत की अनुमति देना है।