बच्चों को अकेले बाहर न भेजें, घरों के आसपास रखें पर्याप्त रोशनी; वन्यजीवों के शिकार पर होगी कानूनी कार्रवाई
Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला-:पहाड़ों पर बर्फबारी और सर्दी बढ़ने के साथ ही वन्यजीवों की मुश्किलें भी बढ़ने लगती हैं। जंगलों में भोजन की कमी होने पर तेंदुए और भालू जैसे वन्यजीव निचले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों का रुख कर सकते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियात बरतने की आवश्यकता है। धर्मशाला के वन मंडल अधिकारी (DFO) अमित शर्मा ने लोगों से अपील की है कि वन्यजीवों की मौजूदगी को गंभीरता से लें और उनके करीब जाने या उन्हें परेशान करने से बचें। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देने की सलाह दी है।
भोजन की तलाश में खेतों और बगीचों तक पहुंच सकते हैं भालू
DFO अमित शर्मा ने बताया कि सर्दियों के मौसम में भालू भोजन की तलाश में मक्की के खेतों और फलों के बगीचों तक पहुंच सकते हैं। इस दौरान अचानक आमना-सामना होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, तेंदुए शिकार की तलाश में रिहायशी इलाकों के आसपास देखे जा सकते हैं। खासकर कुत्तों का शिकार करने के लिए तेंदुओं की आवाजाही आबादी के नजदीक बढ़ सकती है। ऐसे में लोगों को सुबह और शाम के समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।उन्होंने कहा कि घरों के आंगन और आसपास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था रखें, ताकि अंधेरे में वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहा जा सके। अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी जिम्मेदार वयस्क के साथ ही भेजें।
जंगल के रास्तों पर चलते समय बरतें सावधानी
DFO ने भालू प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह दी कि जंगल या सुनसान रास्तों से गुजरते समय आवाज करते हुए चलें, ताकि वन्यजीवों को इंसान की मौजूदगी का पहले ही पता चल सके। यदि किसी क्षेत्र में भालू या तेंदुआ दिखाई देता है, तो उसके पास जाने, उसे घेरने या उकसाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में शांत रहते हुए सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।
वन्यजीवों के शिकार पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
अमित शर्मा ने स्पष्ट किया कि बर्फबारी के दौरान निचले क्षेत्रों में आने वाले वन्यजीवों का शिकार करना कानूनन अपराध है।वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों के शिकार पर जुर्माने और सजा का प्रावधान है।उन्होंने बताया कि अनुसूची-1 में शामिल प्रजातियों के शिकार पर तीन साल तक की कैद हो सकती है। वन विभाग के फील्ड कर्मचारियों को वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखने और शिकार या संघर्ष की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।DFO ने लोगों से अपील की कि वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सतर्कता बरतें।