समर न्यूज | चंडीगढ़
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के आखिरी दिन मंगलवार को नदी जल अधिकारों और राज्य के हितों से जुड़े आठ प्रस्ताव सर्वसमति से पेश किए गए। इनमें पांच प्रस्ताव पानी से जुड़े थे। यमुना के पानी में पंजाब की हिस्सेदारी का दावा, पाकिस्तान की ओर जा रहे पानी के इस्तेमाल के लिए उज्ज बहुउद्देशीय परियोजना को पूरा करने, राजस्थान से पानी का भुगतान लेने, बांध सुरक्षा कानून का विरोध और सिंचाई से जुड़े प्रमुख ढांचों पर राज्य के अधिकारों का मुद्दा शामिल है। इन प्रस्तावों के जरिये आम आदमी पार्टी सरकार ने केंद्र से पंजाब के जल हितों की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की।
इसके अलावा पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ की सीनेट में सदस्यों के नामांकन का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को देने, राज्य की जनकल्याणकारी योजनाएं जारी रखने और श्री करतारपुर साहिब गलियारा दोबारा खोलने की मांग से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। पानी का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक बहस का विषय रहा है। राज्य सरकार का तर्क है कि कृषि पर निर्भर पंजाब में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में उपलब्ध नदी जल का उचित इस्तेमाल और राज्य के हिस्से से जुड़े विवादों का समाधान जरूरी है। सरकार ने किसानों के संगठनों से किए गए वादों के तहत भी इन मुद्दों को विधानसभा में उठाया।
सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने प्रस्ताव में कहा कि 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से पहले यमुना अविभाजित पंजाब के क्षेत्र से होकर बहती थी। इसके बावजूद पंजाब को यमुना के पानी में औपचारिक हिस्सा नहीं मिला। प्रस्ताव में केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय से 25 अप्रैल 2025 को पंजाब सरकार की ओर से दायर शिकायत पर जल्द निर्णय लेने और जल विवाद न्यायाधिकरण गठित करने की मांग की गई। इसमें कहा गया कि यदि केंद्र कोई फैसला नहीं करता, तो पंजाब सरकार अपने अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। एक अन्य प्रस्ताव में रावी नदी के रास्ते पाकिस्तान की ओर जा रहे पानी का इस्तेमाल पंजाब में करने की जरूरत उठाई गई। गोयल के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से निकलने वाली उझ, तरनाह और बसंतर नदियों का पानी माधोपुर हेडवर्क्स के नीचे रावी में मिलता है।
पर्याप्त भंडारण व्यवस्था न होने के कारण इस पानी का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। सरकार ने केंद्र से उझ बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का अनुरोध किया, ताकि पानी को रणजीत सागर बांध की ओर मोड़कर सिंचाई और अन्य जरूरतों में इस्तेमाल किया जा सके। पानी संबंधी प्रस्तावों से पंजाब सरकार ने साफ किया कि वह नदी जल बंटवारे, बांधों के प्रबंधन और दूसरे राज्यों को पानी देने के मुद्दे पर अपना पक्ष केंद्र के सामने मजबूती से रखना चाहती है।
राजस्थान से पानी की कीमत लेने की मांग
प्रस्ताव में कहा गया कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं, इसलिए पंजाब सरकार उसे पानी मुफ्त देने के मौजूदा प्रबंध पर सवाल उठा रही है। राज्य का तर्क है कि पंजाब खुद जल संकट का सामना कर रहा है, जबकि उसके पानी से दूसरे राज्य लाभ उठा रहे हैं। प्रस्ताव में राजस्थान सरकार से पानी की कीमत चुकाने और केंद्र से हर साल भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की गई। हालांकि, इस मांग पर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारों और लागू कानूनी व्यवस्थाओं के तहत होना है।
बांध सुरक्षा कानून और नियंत्रण का सवाल
पांच प्रस्तावों में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 का विरोध दोहराने और भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड के तहत आने वाले रूपनगर, हरिके और फिरोजपुर के प्रमुख सिंचाई हेडवर्क्स पर नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों को चुनौती देने का मुद्दा भी शामिल है। पंजाब सरकार का कहना है कि जल प्रबंधन में राज्य के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। इन मांगों का प्रभाव केंद्र और संबंधित राज्यों के साथ भविष्य की बातचीत पर पड़ सकता है।
कल्याणकारी योजनाएं जारी रखने का प्रस्ताव
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अलग से राज्य सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं जारी रखने का प्रस्ताव पेश किया। इनमें मुख्यमंत्री माताएं-धीयां योजना, हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, खेती के लिए बिजली, मुख्यमंत्री सेहत योजना, आम आदमी क्लीनिक, महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा, तीर्थ यात्रा और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी वित्तीय योजनाएं शामिल हैं। सरकार ने कहा कि इनके लिए बजट में प्रावधान किया जाएगा।