सागर पाहवा | मोहाली
समर न्यूज
पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को मोहाली की अदालत में फाइनल चालान पेश किया। चालान में कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया है। इसके अलावा कुछ कंपनियों को भी आरोपी पक्ष के तौर पर शामिल किया गया है।
मामले में कथित संपत्तियों का मूल्य पहले बताए गए करीब 700 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 736 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि, अभियोजन पक्ष के आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।
विजिलेंस की इस कार्रवाई के साथ मामले में वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, संपत्तियों और आय के स्रोतों से संबंधित दस्तावेजों का दायरा और विस्तृत हो गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले दाखिल चालान और संबंधित दस्तावेजों के लगभग 52 से 53 हजार पन्ने हो चुके हैं। इससे पहले अगस्त 2025 में अदालत में करीब 40 हजार पन्नों का चालान पेश किए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय दस्तावेज चार ट्रंकों में लाए गए थे।
जांच के दौरान विजिलेंस ने मजीठिया, उनके परिजनों और उनसे जुड़ी कंपनियों के लगभग 400 बैंक खातों की पड़ताल की। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच में 200 से अधिक गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। पंजाब के अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में संपत्तियों तथा वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच मजीठिया से संबंधित संपत्तियां उनकी ज्ञात आय के मुकाबले अधिक थीं। शुरुआती जांच में कथित संपत्तियों का मूल्य लगभग 540 करोड़ रुपये बताया गया था। आगे की पड़ताल के दौरान यह आंकड़ा करीब 700 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया, जबकि अब यह लगभग 736 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। एजेंसी ने कुछ संपत्तियों और लेन-देन में कथित बेनामी व्यवस्था की आशंका जताई है।
}सहयोगी के खिलाफ भी चालान: इस मामले में मजीठिया के कथित करीबी सहयोगी और कारोबारी हरप्रीत सिंह गुलाटी के खिलाफ भी जनवरी 2026 में मोहाली अदालत में 11 हजार से अधिक पन्नों का चालान दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसमें 2007 से 2017 के बीच के कथित वित्तीय लेन-देन, कंपनियों में हिस्सेदारी और संपत्तियों का विवरण शामिल बताया गया था। जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ लेन-देन मजीठिया से जुड़े कारोबारी नेटवर्क का हिस्सा थे। मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 25 जून 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उसी दिन उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह मामला मादक पदार्थों से जुड़े पुराने मामले की जांच में सामने आए वित्तीय लेन-देन की पड़ताल से जुड़ा है।
}सुप्रीम कोर्ट से मिल चुकी जमानत: मजीठिया को 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई थी। जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में अभियोजन पक्ष को अपने आरोप साक्ष्यों के आधार पर साबित करने होंगे और बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। फाइनल चालान दाखिल होने के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कंपनियों को किन आधारों पर आरोपी बनाया गया है और उनके कथित वित्तीय लेन-देन की क्या भूमिका है, इसका विस्तृत विवरण चालान के अध्ययन और अदालत की कार्यवाही से स्पष्ट होगा। चालान पेश करना आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है।