Shimla, Sanju
शिमला जिले के ऊपरी क्षेत्रों में सेब के पेड़ों की कटाई और वन भूमि पर कब्जे को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने की घोषणा के बीच, ठियोग के विधायक और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर पक्ष न रखने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह कदम पहले उठाया जाना चाहिए था ताकि बेहतर न्याय मिल सकता।
राठौर ने कहा कि इस मामले में प्रदेश सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए थी, क्योंकि अब हजारों फलदार पेड़ काटे जा चुके हैं और कई लोग बरसात के मौसम में बेघर हो गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अतिक्रमण के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन पेड़ काटने जैसे कदम सावधानीपूर्वक और उचित समय पर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सावन के महीने और सेब सीजन में इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं लगती।
राठौर ने यह भी बताया कि इस मामले पर आज शाम मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में बैठक रखी गई है जिसमें वे स्वयं भी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में इस तरह की मुहिम पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय शुरू हुई थी और उन्होंने छोटे किसानों को राहत देने की बात कही थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह मामला अधर में रह गया।
ठियोग को मिलेगा विकास का नया मुकाम
राठौर ने ठियोग शहर को हाल ही में मिला राष्ट्रीय स्वच्छता अवॉर्ड मिलने पर जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि आने वाले एक-दो वर्षों में ठियोग की गिनती देश के अग्रणी और सुंदर शहरों में हो। इसके लिए विशेष कार्य योजना तैयार की गई है, जिसमें शहर का सौंदर्यकरण, सीवरेज सुविधा, जल आपूर्ति और सड़क नेटवर्क को और बेहतर करने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन योजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा।