क्रिटिकल केयर और जीआई सर्जरी विभाग को सरकार की मंजूरी, रिक्त पद भरने का भी रास्ता साफ
रोबोटिक सर्जरी के लिए 90 हजार रुपये शुल्क
Summer express/शिमला/संजू-:अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी (AIMSS) चमियाना में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। संस्थान में दो नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग क्रिटिकल केयर और जीआई सर्जरी शुरू किए जाएंगे। खास बात यह है कि ये दोनों विभाग अभी तक इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (IGMC) शिमला में भी उपलब्ध नहीं हैं। इन विभागों के शुरू होने से गंभीर मरीजों और पेट व पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को आधुनिक उपचार की सुविधा एक ही संस्थान में मिल सकेगी। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों और संस्थानों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में संस्थान के प्रिंसिपल डॉ. बृज शर्मा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर शर्मा ने अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार ने संस्थान में विभिन्न श्रेणियों के रिक्त पदों को भरने और नए पद सृजित करने को मंजूरी प्रदान की है। इनमें सुरक्षा कर्मी, वार्ड अटेंडेंट, सफाई कर्मचारी, डाइटिशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, चीफ फार्मासिस्ट, सीएसडी सुपरवाइजर और ड्राइवर सहित अन्य पद शामिल हैं। इससे अस्पताल के संचालन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार होगा। कर्मचारियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए संस्थान को दो बसें भी उपलब्ध करवाई गई हैं।
क्रिटिकल केयर में गंभीर मरीजों को मिलेगी विशेष सुविधा
क्रिटिकल केयर विभाग में उन मरीजों का उपचार किया जाएगा, जिनकी स्थिति बेहद गंभीर होती है और जिन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत रहती है। इसमें वेंटिलेटर पर रखे गए मरीजों और आईसीयू में भर्ती रोगियों को विशेष देखभाल मिलेगी। फेफड़े, हृदय और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों के काम करना बंद करने, सांस लेने में गंभीर परेशानी, गंभीर संक्रमण, ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिरने और हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों में यह विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके अलावा गंभीर हार्ट अटैक, अनियंत्रित धड़कन, ब्रेन स्ट्रोक, सिर की गंभीर चोट और ब्रेन हैमरेज के मरीजों को भी लाभ मिलेगा।
जीआई सर्जरी से पेट और पाचन तंत्र के रोगों का होगा उपचार
जीआई सर्जरी विभाग में भोजन नली, पेट, छोटी और बड़ी आंत, लिवर, पित्ताशय और पैंक्रियाज से संबंधित बीमारियों का ऑपरेशन किया जाएगा। पेट, आंत, कोलन, लिवर, पैंक्रियाज और भोजन नली के कैंसर या ट्यूमर से पीड़ित मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा पित्ताशय की पथरी और गंभीर हर्निया जैसी समस्याओं का भी सर्जरी के माध्यम से उपचार संभव होगा। विभाग शुरू होने से मरीजों को इन जटिल ऑपरेशन के लिए अन्य बड़े अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
रोबोटिक सर्जरी के लिए 90 हजार रुपये शुल्क
संस्थान में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी मरीजों के लिए उपलब्ध है। इसके लिए करीब 90 हजार रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जो निजी अस्पतालों में होने वाले खर्च की तुलना में काफी कम है। संस्थान प्रबंधन ने इस सुविधा के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया है।
सीटीवीएस में भी शुरू होगी रोबोटिक सर्जरी
चमियाना के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग में भी जल्द रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए रोबोटिक सिस्टम में अतिरिक्त आर्म उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री के समक्ष भी यह मामला उठाया गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद सीटीवीएस विभाग में रोबोटिक तकनीक से ऑपरेशन शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।
एक साल बाद दोबारा शुरू हुई ओपन हार्ट सर्जरी
संस्थान में करीब एक साल से बंद ओपन हार्ट सर्जरी की सुविधा अक्टूबर में दोबारा शुरू कर दी गई है। सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा के अनुसार अब तक तीन मरीजों के सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। पहला ऑपरेशन छह अक्टूबर को कुल्लू निवासी मरीज का हुआ। दूसरा ऑपरेशन 27 अक्टूबर को 45 वर्षीय अमन गीसेदा का किया गया, जिन्हें पहले दो बार कार्डियक फेलियर हो चुका था। तीसरा ऑपरेशन 30 अक्टूबर को किया गया। मरीज के दिल में छेद था और एक वाल्व में लीकेज थी। ऑपरेशन के दौरान दिल का छेद बंद करने के साथ वाल्व भी बदला गया। तीनों ऑपरेशन सीटीवीएस और कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक किए।