Summer express, कुरुक्षेत्र। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने एक दिवसीय हरियाणा दौरे के दौरान रविवार को धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। राष्ट्रपति ने अपने दौरे की शुरुआत प्रसिद्ध शक्तिपीठ देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में पूजा-अर्चना करके की। इस दौरान उन्होंने देशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उनके साथ हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे।
मां भद्रकाली मंदिर में दर्शन के बाद राष्ट्रपति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने विश्वविद्यालय के हीरक जयंती समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने समारोह के विशेष लोगो का भी अनावरण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने हरियाणा की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक परंपराओं और देश के विकास में राज्य के योगदान की सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा वीरों और देवों की भूमि है। इसी पवित्र धरती से पूरी दुनिया को श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश मिला। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के लोगों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के लोगों ने हमेशा देश के लिए त्याग और बलिदान की भावना का परिचय दिया है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने महिलाओं और बेटियों की उपलब्धियों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान रेवाड़ी की एक 12 वर्षीय बालिका के साहस का उल्लेख किया, जिसने वर्ष 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में नमक कानून तोड़ा था और इसके लिए अपनी पूरी बचत लगा दी थी। राष्ट्रपति ने कहा कि हरियाणा की बेटियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और साहस से देश का नाम रोशन किया है।
खेलों में प्रदेश की महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने निशानेबाज मनु भाकर, मुक्केबाज स्वीटी बूरा और जैस्मिन लंबोरिया का नाम लिया। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया है।
समारोह के दौरान कैथल जिले के मुनारेडी गांव के 11वीं कक्षा के छात्र चेतन अत्री ने राष्ट्रपति को उनका बनाया हुआ सिलहौटी शैली का स्केच भेंट किया। राष्ट्रपति ने छात्र की कलाकृति की सराहना की और उससे उसकी पढ़ाई के बारे में बातचीत भी की। इस दौरान छात्र के चेहरे पर राष्ट्रपति से मुलाकात की खुशी दिखाई दी।
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए कुरुक्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे। जिला प्रशासन की ओर से 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को पूरे जिले को नो फ्लाइंग जोन और रेड जोन घोषित किया गया था। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के निर्देशों पर पुलिस बल की तैनाती के साथ ड्रोन निगरानी और प्रशासनिक अधिकारियों की विशेष ड्यूटियां लगाई गई थीं, ताकि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचीं। यहां उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद के 100वें बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रकार मंदिर में पूजा-अर्चना से शुरू हुआ राष्ट्रपति का कुरुक्षेत्र दौरा विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।