Summer express/शिमला, संजू-: हिमाचल प्रदेश राजकीय दंत महाविद्यालय एवं अस्पताल में एमडीएस रेजिडेंट डॉक्टरों को पिछले तीन महीने से स्टाइपेंड नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। लगातार भुगतान में देरी से परेशान डॉक्टरों ने सोमवार को कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो ओपीडी सेवाएं बंद कर हड़ताल शुरू की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान रेजिडेंट डॉक्टरों ने ‘नो स्टाइपेंड, नो वर्क’ और ‘ना बहाने, ना इनकार, हमें चाहिए अपना अधिकार’ जैसे नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि नेशनल डेंटल कमीशन (एनडीसी) की गाइडलाइन के मुताबिक हर महीने के पहले सप्ताह में स्टाइपेंड जारी होना चाहिए, लेकिन कॉलेज में दो से तीन महीने तक भुगतान नहीं किया जा रहा है।डॉ. प्रणव ने बताया कि तीसरे वर्ष में पहुंचने के बावजूद उन्हें अपने हक का स्टाइपेंड लेने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।भुगतान को लेकर अधिकारी कोई निश्चित तारीख नहीं बता रहे हैं।वहीं, डॉक्टरों को किराये के कमरों में रहकर अपना खर्च उठाना पड़ रहा है और मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री भी कई बार अपनी जेब से खरीदनी पड़ती है।डॉ. हृदेश कुमार दीक्षित ने कहा कि कॉलेज की स्थापना वर्ष 1998 में हुई थी, लेकिन आज तक रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है।मजबूरन डॉक्टरों को संजौली और आसपास के क्षेत्रों में किराये पर रहना पड़ता है। कुछ डॉक्टरों को जंगल के आसपास रहना पड़ता है, जहां सुरक्षा संबंधी खतरे भी बने रहते हैं। हाल ही में एक डॉक्टर पर बंदरों ने हमला भी किया था।डॉ. तनुजा ठाकुर ने बताया कि विभाग में उपचार के लिए जरूरी बुनियादी सामग्री की कमी रहती है। डॉक्टरों ने इस संबंध में प्रिंसिपल को लिखित शिकायत भी दी है।उधर, कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. योगेश भारद्वाज ने आश्वासन दिया है कि लंबित स्टाइपेंड जल्द जारी किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया चल रही है और संबंधित फाइलों पर हस्ताक्षर किए जाने हैं।