Summer express, गुरुग्राम | हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में सरकारी कामकाज में लापरवाही बरतने पर सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के पटवारी मंदीप हुड्डा को निलंबित करने के आदेश जारी किए। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित पटवारी का मुख्यालय बदलने के निर्देश भी उपायुक्त को दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आमजन की शिकायतों के निपटारे में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को गुरुग्राम के स्वतंत्रता सेनानी जिला परिषद हॉल में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित लोगों ने अपनी समस्याएं और शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। बैठक में कुल 15 शिकायतों को सुनवाई के लिए शामिल किया गया था। इनमें राजस्व विभाग सहित कई अन्य सरकारी विभागों से जुड़े मामले भी शामिल रहे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी मांगी। अधिकारियों से जवाब-तलब करने के बाद जब मामले में पटवारी मंदीप हुड्डा की कार्यप्रणाली में लापरवाही सामने आई तो मुख्यमंत्री ने तत्काल उसके निलंबन के आदेश दिए। उन्होंने उपायुक्त को निर्देश दिया कि पटवारी का मुख्यालय भी बदला जाए, ताकि मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और उनका निर्धारित समयसीमा के भीतर समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ने चाहिए। प्रत्येक शिकायत पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को जवाबदेही के साथ कार्रवाई करनी होगी।
बैठक में जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने एक-एक शिकायत की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट और अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता बनाए रखें और किसी भी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि प्रदेश सरकार आमजन को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी कामकाज में लापरवाही, शिकायतों की अनदेखी और समाधान में देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी में कोताही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।