Summer express/बिलासपुर/सुभाष -:डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के साथ-साथ साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना बेहद आवश्यक है। महिलाओं को न केवल अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए, बल्कि किसी भी तरह के उत्पीड़न और ऑनलाइन अपराध के खिलाफ आवाज उठाने का साहस भी रखना चाहिए। यह बात हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने बुधवार को बिलासपुर में आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कही। राज्य महिला आयोग की ओर से जिला परिषद सभागार में स्टॉकिंग, साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के प्रति महिलाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्या नेगी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। वर्तमान समय में तकनीक और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ महिलाओं के सामने ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर ठगी, पीछा करने और निजता के उल्लंघन जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रत्येक महिला को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जुड़े खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।उन्होंने कहा कि स्टॉकिंग को सामान्य व्यवहार समझकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उसका बार-बार पीछा करना, संपर्क करने का प्रयास करना या उसकी गतिविधियों पर नजर रखना उसकी स्वतंत्रता, निजता और सुरक्षा का उल्लंघन है। महिलाओं को ऐसे मामलों में चुप रहने के बजाय बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करवानी चाहिए, ताकि समय रहते उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
विद्या नेगी ने साइबर अपराधों से बचाव के लिए ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक वेबसाइट भरोसेमंद नहीं होती। इसलिए ऑनलाइन खरीदारी या भुगतान करने से पहले वेबसाइट की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। अनजान स्रोतों से प्राप्त संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें तथा अपनी व्यक्तिगत, बैंकिंग और गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और आम नागरिकों से अपील की कि वे ओटीपी, बैंक खाते से संबंधित जानकारी और यूपीआई पिन को गोपनीय रखें। किसी भी अनजान कॉल, संदेश या संदिग्ध लिंक के माध्यम से मांगी गई जानकारी साझा न करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। समय पर शिकायत मिलने से संबंधित लेनदेन पर आवश्यक कार्रवाई करने और संभावित आर्थिक नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी जागरूक करना चाहिए। समाज में ऐसा वातावरण तैयार करना आवश्यक है, जहां महिलाएं बिना किसी भय, दबाव या संकोच के अपनी बात रख सकें। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और डिजिटल स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ सामाजिक सहभागिता भी बेहद महत्वपूर्ण है।कार्यक्रम में आयोग के विधि अधिकारी यशपाल शर्मा ने स्टॉकिंग से संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध बार-बार उसका पीछा करना, उससे संपर्क स्थापित करने का प्रयास करना अथवा उसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना स्टॉकिंग की श्रेणी में आता है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 78 के तहत स्टॉकिंग को दंडनीय अपराध बताते हुए इसके कानूनी पहलुओं, दंडात्मक प्रावधानों और शिकायत दर्ज करवाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने साथ होने वाली ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और समय रहते कानूनी सहायता प्राप्त करनी चाहिए।
बाल विकास परियोजना अधिकारी घुमारवीं रंजना ने महिलाओं से जुड़े सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए प्रदेश सरकार की ओर से महिला कल्याण और सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। साथ ही किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए।यूको बैंक के प्रतिनिधि विजय दीवान ने डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।