नई दिल्ली | मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने के लिए और बढ़ा दी है। यह फैसला 13 अगस्त 2025 से प्रभावी होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे बहस के बाद पास कर दिया गया।
गृह मंत्री ने क्या कहा?
अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में कानून व्यवस्था की स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। राज्य में शांति बहाल करने, प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने और स्थायी समाधान तलाशने के लिए राष्ट्रपति शासन का विस्तार जरूरी है।
पिछले साल से जारी है तनाव
मणिपुर में मई 2023 से मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव का दौर चल रहा है। इस हिंसा में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
क्यों लगाना पड़ा राष्ट्रपति शासन?
राज्य सरकार के हालात पर नियंत्रण में विफल रहने के कारण केंद्र सरकार ने 2024 में पहली बार मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया था। तब से अब तक अर्धसैनिक बलों की तैनाती, शांति वार्ता और विभिन्न प्रयासों के बावजूद राज्य में स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
फिलहाल कोई स्पष्ट समाधान नहीं
हालात की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति शासन का यह विस्तार स्थायित्व और विश्वास बहाली के लिए जरूरी कदम हो सकता है, लेकिन मणिपुर में शांति स्थापना के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।