दोहा | विश्व की अग्रणी एयरलाइनों में शामिल कतर एयरवेज एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विवादों में घिर गई है। मामला अक्टूबर 2020 का है, जब दोहा के हमाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पांच ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं को बिना किसी पूर्व सूचना के विमान से उतारकर जबरन शारीरिक जांच की गई थी। यह कदम एक लावारिस नवजात की तलाश के नाम पर उठाया गया था, जिसने बाद में वैश्विक मानवाधिकारों की गरिमा पर बहस छेड़ दी।
क्या हुआ था उस रात?
बताया जाता है कि एयरपोर्ट वॉशरूम में एक नवजात बच्चा प्लास्टिक बैग में गंभीर हालत में मिला था। उसकी मां की तलाश के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने कई महिलाओं को बिना सहमति और महिला डॉक्टर की मौजूदगी के आंतरिक जांच के लिए मजबूर किया। पीड़ित महिलाओं ने इस प्रक्रिया को “शोषण और यौन उत्पीड़न” करार दिया है।
मानसिक आघात और PTSD के आरोप
महिलाओं का कहना है कि घटना के बाद वे भावनात्मक रूप से बुरी तरह टूट गईं और कई को पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) के लक्षण भी महसूस हुए।
अब कोर्ट में पहुंचा मामला
चार पीड़ित महिलाओं ने ऑस्ट्रेलिया की संघीय अदालत में कतर एयरवेज, हमाद एयरपोर्ट अथॉरिटी और कतर सरकार के खिलाफ केस दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि उन्हें झूठी कैद, यौन उत्पीड़न और शारीरिक हमले का सामना करना पड़ा, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
कतर की सफाई और माफीनामा
घटना के तुरंत बाद कतर सरकार ने माफी मांगते हुए बच्चे की मां को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी थी। हालांकि, कतर एयरवेज ने अब तक इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
कूटनीतिक और वैश्विक असर
यह मामला केवल एक एयरलाइंस तक सीमित नहीं रहा। इससे ऑस्ट्रेलिया-कतर संबंधों में भी तनाव आ गया है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में महिला यात्रियों की सुरक्षा, निजता और गरिमा पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है।
क्या बदलेंगी एयरलाइंस नीतियां?
मामला अदालत में लंबा चल सकता है, लेकिन इसका असर वैश्विक विमानन नीति, सुरक्षा जांच के तरीकों और महिला यात्रियों के अधिकारों पर जरूर पड़ सकता है। यदि पीड़ितों को न्याय मिला, तो यह घटना भविष्य में एयरपोर्ट सुरक्षा प्रक्रियाओं के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।