लुधियाना | शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा ने अकाली दल के भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को दोबारा खड़ा करने की कोशिशें तो हो रही हैं, लेकिन जब तक सुखबीर बादल और हुक्मनामे से मुंह मोड़ने वाले नेता पार्टी में रहेंगे, तब तक अकाली दल का पुनरुत्थान संभव नहीं है।
ढींडसा, युवा नेता कुलदीप सिंह के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल को एक विश्वसनीय और पंथक सिद्धांतों पर आधारित संगठन के रूप में फिर से स्थापित करने की जरूरत है, जो पंजाब की जनता और खासतौर पर धार्मिक वर्गों की आवाज बन सके।
“हुक्मनामे का पालन न करने पर नहीं बन सकता जनविश्वास”
ढींडसा ने स्पष्ट किया कि पार्टी को नया संगठनात्मक ढांचा देने की बातें तब तक कारगर नहीं होंगी, जब तक नेतृत्व पंथक परंपराओं के अनुसार नहीं चलता। उन्होंने कहा कि अकाली दल की वापसी पंथ के प्रति निष्ठा और सिद्धांतों के पालन से ही संभव है।
अकाली दल में वापसी पर ढींडसा का इनकार
जब उनसे पार्टी में फिर से शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा, “मेरी अकाली दल में वापसी की कोई संभावना नहीं है। मेरे पिता स्व. सुखदेव सिंह ढींडसा ने अपने जीवनकाल में ही कहा था कि यदि सुखबीर बादल इस्तीफा देकर हुक्मनामे का पालन करते हैं, तभी पार्टी का भला हो सकता है। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, और मैं अपने पिता के विचारों का सम्मान करता हूं।”
पंथक संगठनों को मजबूत करने पर जोर
ढींडसा ने कहा कि उनका उद्देश्य अब केवल एक है—ऐसा मजबूत पंथक संगठन बनाना, जिस पर पंजाब के लोग भरोसा कर सकें और जो राज्य की समस्याओं के समाधान में प्रभावी भूमिका निभा सके।
इस अवसर पर उनके साथ कुलदीप सिंह सिद्धू, सुखदेव सिंह चक कलां, जसविंदर सिंह और मेजर सिंह जैसे कई स्थानीय नेता भी मौजूद थे।